Lenskart Controversy
Lenskart Controversy: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित लेंसकार्ट के एक शोरूम में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक कथित धार्मिक संगठन के कार्यकर्ता वहां जबरन दाखिल हो गए। ‘धर्म जागरण समिति’ से जुड़े इन कार्यकर्ताओं ने शोरूम के भीतर ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए और वहां काम कर रहे कर्मचारियों को जबरन तिलक (टीका) लगाना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने सबसे पहले स्टाफ के सदस्यों के नाम पूछे और उन्हें हिदायत दी कि वे अपनी हिंदू पहचान को गर्व के साथ प्रदर्शित करें। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि वे तिलक लगाकर ही काम करें ताकि ग्राहकों को पता चल सके कि वे हिंदू हैं। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही संगठन की सह-संयोजिका भारती वैष्णव ने कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। वीडियो में वह अपना लेंसकार्ट का चश्मा दिखाते हुए कहती हैं कि वह खुद इसी ब्रांड की ग्राहक रही हैं और उन्होंने दर्जनों लोगों को यहां से खरीदारी करने की सलाह दी है। हालांकि, कंपनी की कथित हिंदू विरोधी नीतियों के विरोध में उन्होंने अपना चश्मा तोड़कर फेंकने की बात कही और ब्रांड के पूर्ण बहिष्कार (बॉयकाट) का ऐलान किया। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि उन्हें अपनी धार्मिक पहचान छिपाने के बजाय उस पर गर्व होना चाहिए और यह कोई फैशन नहीं बल्कि स्वाभिमान का विषय है।
विवाद की मुख्य जड़ वह आरोप है जिसमें कहा गया कि लेंसकार्ट अपने हिंदू कर्मचारियों को तिलक, कलावा या जनेऊ जैसे धार्मिक प्रतीक धारण करने से रोकता है। भारती वैष्णव ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक दस्तावेज का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कंपनी एक तरफ तो मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनने की अनुमति देती है, लेकिन हिंदू प्रतीकों पर पाबंदी लगाती है। उन्होंने शोरूम में मौजूद स्टाफ से सवाल किया कि क्या वे किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को उनके धार्मिक पालन से रोकेंगे? उन्होंने तर्क दिया कि कंपनी का दोहरा मापदंड हिंदू आस्था का अपमान है।
बढ़ते विवाद और सोशल मीडिया पर ‘बॉयकाट लेंसकार्ट’ ट्रेंड होने के बाद कंपनी ने रक्षात्मक रुख अपनाया। लेंसकार्ट ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। कंपनी ने अपनी ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ को अपडेट करते हुए अब इसे पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। नई नीति के तहत अब तिलक, बिंदी, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे सभी धार्मिक व सांस्कृतिक प्रतीकों को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है। कंपनी ने कहा कि यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे इसके लिए खेद प्रकट करते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर वायरल हो रहा ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’ का डॉक्यूमेंट काफी पुराना था और वह कंपनी की वर्तमान विचारधारा या नीतियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। बंसल ने जोर देकर कहा कि उनकी कंपनी में किसी भी प्रकार की धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई पाबंदी नहीं है और वे समानता के सिद्धांतों पर विश्वास रखते हैं। उन्होंने इस भ्रम की स्थिति के कारण पैदा हुए तनाव के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है और विश्वास दिलाया है कि भविष्य में ऐसी गलतफहमियां नहीं होंगी।
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