Raipur Nakti Village Demolition : रायपुर के माना इलाके के अंतर्गत आने वाले ग्राम नकटी में सोमवार सुबह से ही भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रस्तावित ‘विधायक कॉलोनी’ के निर्माण के लिए प्रशासन ने यहां 48 घरों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए प्रशासन ने रविवार देर रात से ही गांव की घेराबंदी कर दी थी और 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। जैसे ही सोमवार सुबह राजस्व विभाग की टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची, स्थानीय निवासियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो चुका है और लोग अपने घरों को बचाए रखने के लिए जेसीबी मशीनों के सामने अड़ गए हैं।

नोटिस और भारी पुलिस बल की तैनाती से बढ़ता आक्रोश
प्रशासन द्वारा की जा रही इस बेदखली कार्रवाई का आधार शुक्रवार रात को चस्पा किए गए नोटिसों को बनाया गया है। इससे पहले 26 जून को भी जब राजस्व विभाग की टीम पहुंची थी, तो ग्रामीणों ने अधिकारियों का घेराव कर भाजपा नेताओं के विरोध में जमकर नारेबाजी की थी। निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने मुहर्रम की छुट्टियों के दौरान आनन-फानन में नोटिस थमाए, जो पूरी तरह से अनुचित है। रात भर पुलिस बल की मौजूदगी ने गांव के माहौल को और भी अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में घरों से सामान बाहर निकालने की प्रक्रिया जारी है, जबकि ग्रामीण लगातार ‘वापस जाओ’ के नारे लगा रहे हैं।

सरकारी जमीन बनाम ग्रामीणों का दशकों पुराना बसेरा
प्रशासन का दावा है कि ये मकान सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर बनाए गए हैं, इसलिए इन्हें हटाना कानूनी रूप से आवश्यक है। दूसरी ओर, ग्रामीणों का तर्क है कि वे यहां वर्षों से रह रहे हैं और यह भूमि गांव की आबादी का हिस्सा है। निवासियों ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह जमीन सरकारी अवैध कब्जा थी, तो उन्हें यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान कैसे स्वीकृत किए गए? ग्रामीणों के अनुसार, वार्ड नंबर 16 और 17 के इन 48 घरों की जमीन पहले गांव की निस्तारी भूमि हुआ करती थी, जो धीरे-धीरे आबादी में शामिल हो गई। अब ‘विधायक कॉलोनी’ के लिए उन्हें बेघर किया जाना उनके साथ बड़ा अन्याय है।


पिछले साल भी हुआ था विरोध, अब फिर छाई चिंता
यह पहला अवसर नहीं है जब नकटी के इन परिवारों को बेदखली का सामना करना पड़ रहा है। ठीक एक साल पहले भी जिला प्रशासन ने इसी तरह के नोटिस जारी किए थे, लेकिन तब स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और ग्रामीणों के व्यापक विरोध के चलते कार्रवाई को स्थगित कर दिया गया था। इस बार प्रशासन ने और भी कड़े कदम उठाते हुए भारी सुरक्षा के बीच कार्रवाई को अंजाम दिया है। अपने सिर से छत छिन जाने के डर से ग्रामीणों में भारी दहशत और चिंता है। वर्तमान में पूरा नकटी गांव इस बेदखली के साये में है और लोग एक बार फिर शासन-प्रशासन से सहानुभूतिपूर्ण विचार करने की गुहार लगा रहे हैं।
Read More : CG Electricity Bill : छत्तीसगढ़ बिजली बिल सरचार्ज पर बड़ी राहत, कंपनी ने भ्रामक खबरों का किया खंडन, जानें सच











