Raipur Nurse Murder: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। टिकरापारा थाना क्षेत्र में एक निजी अस्पताल में कार्यरत 23 वर्षीय नर्स प्रियंका दास की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और महिला सुरक्षा को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई है।
कमरे में मिली खून से सनी लाश
जानकारी के मुताबिक, प्रियंका दास मूल रूप से मनेंद्रगढ़ की रहने वाली थी और रायपुर के टिकरापारा इलाके में किराए के मकान में अपनी तीन सहेलियों के साथ रहती थी। वह एक निजी अस्पताल में नर्स के तौर पर काम कर रही थी और घटना से एक दिन पहले ही डे शिफ्ट में ड्यूटी पर थी।
पुलिस को जब प्रियंका की लाश मिली, तो उसका कमरा खून से सना हुआ था। शरीर पर गहरे चाकू के निशान और खासकर सीने पर गंभीर चोटें थीं, जो घटना की बेरहमी और गुस्से से की गई हत्या को दर्शाती हैं।
बॉयफ्रेंड ने किया जुर्म कबूल
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बॉयफ्रेंड को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में उसने गुनाह कबूल करते हुए बताया कि प्रियंका किसी और लड़के से बात करती थी, जिससे वह नाराज था। इसी शक और गुस्से में आकर उसने चाकू से हमला कर उसकी जान ले ली।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठा कर जांच शुरू कर दी है।
कांग्रेस का सरकार पर हमला
इस जघन्य हत्या को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर लिखा,
“रायपुर में नर्स की बेरहमी से हत्या, भाजपा का कुशासन बेनकाब! अपराधी बेलगाम हैं, पुलिस लाचार और सरकार खामोश। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, भाजपा सरकार की फेल कानून व्यवस्था की तस्वीर है।”
कांग्रेस का कहना है कि राजधानी में महिला की सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं है, तो बाकी प्रदेश का क्या हाल होगा? पार्टी ने इसे भाजपा के कुशासन की गवाही बताया है।
सवालों के घेरे में कानून व्यवस्था
इस घटना ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी में दिनदहाड़े हत्या होना और वह भी किसी महिला स्वास्थ्यकर्मी की — यह दर्शाता है कि आपराधिक मानसिकता के लोग बेखौफ हैं।प्रियंका दास की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। एक युवा नर्स, जो दिन-रात मरीजों की सेवा में लगी थी, उसकी जिंदगी किसी की ईर्ष्या और गुस्से की भेंट चढ़ गई। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस मामले में त्वरित न्याय दिला पाती है या यह भी सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाएगा।