PRSU Raipur Fee Hike : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित प्रतिष्ठित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) प्रशासन द्वारा परीक्षा और अन्य शैक्षणिक शुल्कों में की गई भारी बढ़ोतरी के खिलाफ छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने मोर्चा खोल दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा लिए गए इस फैसले पर संगठन ने अपनी गहरी नाराजगी और कड़ा विरोध दर्ज कराया है। एबीवीपी का स्पष्ट तौर पर कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना या छात्रों से संवाद किए एक झटके में शुल्कों में बेतहाशा वृद्धि कर दी है। इस अदूरदर्शी निर्णय के कारण विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हजारों छात्र-छात्राओं पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

एबीवीपी ने फैसले को बताया छात्र विरोधी, तत्काल वापस लेने की चेतावनी
छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस नए आदेश को पूरी तरह से छात्र विरोधी और दमनकारी करार दिया है। एबीवीपी के पदाधिकारियों ने कुलपति और कुलसचिव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इस बढ़ी हुई फीस को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की पुरजोर मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि विश्वविद्यालय बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने के बजाय केवल अपनी तिजोरी भरने के लिए छात्रों की जेब पर डाका डाल रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षा फीस में हुई 46 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी
एबीवीपी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने सेमेस्टर परीक्षा की फीस को सीधे ₹1,075 और वार्षिक परीक्षा की फीस को ₹1,085 से बढ़ाकर ₹1,580 कर दिया है। संगठन का दावा है कि यह एकमुश्त बढ़ोतरी करीब 46 प्रतिशत है, जो कि पूरी तरह से अनुचित है। छात्र नेताओं का कहना है कि पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र गरीब, मध्यमवर्गीय और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आते हैं। ऐसे में परीक्षा फीस में इतनी बड़ी वृद्धि के कारण कई होनहार छात्रों के सामने पढ़ाई छोड़ने तक का संकट खड़ा हो सकता है।
₹5000 वेरिफिकेशन फीस तय करने पर भी छात्र संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति
परीक्षा शुल्क के अलावा, एबीवीपी ने विश्वविद्यालय द्वारा मार्कशीट (अंकसूची) और सिलेबस (पाठ्यक्रम) वेरिफिकेशन (सत्यापन) के लिए तय की गई नई फीस पर भी तीखा विरोध जताया है। यूनिवर्सिटी ने अब इस काम के लिए ₹5,000 की मोटी रकम तय कर दी है। संगठन का कहना है कि जब कोई छात्र नई नौकरी, उच्च शिक्षा में एडमिशन या किसी अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्य के लिए अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराने आता है, तो उससे इतनी बड़ी राशि वसूलना कतई न्यायसंगत नहीं है। यह पूर्व छात्रों और वर्तमान छात्रों दोनों के साथ अन्याय है।
शिक्षा को सुलभ बनाने के दावों के बीच, महंगा करने का लगा संगीन आरोप
एबीवीपी रायपुर महानगर के मंत्री सुजल गुप्ता ने विश्वविद्यालय की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार और प्रशासन मंचों से शिक्षा को सरल, सुलभ और हर वर्ग तक पहुंचाने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। छात्रों पर लगातार आर्थिक बोझ लादा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमित परीक्षा फीस में बेतहाशा वृद्धि करना और इसके साथ ही हर साल फीस में 5 प्रतिशत की स्वतः बढ़ोतरी करने का नियम बनाना पूरी तरह से छात्र हितों के खिलाफ है और यह शिक्षा के व्यापारीकरण को दर्शाता है।
मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन और विश्वविद्यालय तालाबंदी की दी चेतावनी
अपनी मांगों को लेकर मुखर एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं। इनमें पहली मांग परीक्षा फीस में की गई बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेना, दूसरी मांग हर साल फीस में 5% की वृद्धि करने के नियम को हमेशा के लिए रद्द करना, और तीसरी मांग दस्तावेज वेरिफिकेशन शुल्क को व्यावहारिक रूप से कम करना शामिल है। संगठन ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए निर्णय वापस नहीं लिया, तो छात्र हितों की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन, चक्काजाम और विश्वविद्यालय परिसर की तालाबंदी की जाएगी।











