अपराध

Rajasthan: शिक्षिका की संदिग्ध हत्या, भाजपा शासित राज्य में महिला सुरक्षा पर उठे सवाल

Rajasthan : नर्स के बाद अब शिक्षिका। मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कलिंजरा में मंगलवार को दिनदहाड़े एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका की उसके पूर्व प्रेमी ने भीड़ भरी सड़क पर बेरहमी से हत्या कर दी। सुरक्षा गार्ड पास में होने के बावजूद सिर्फ ‘तमाशबीन’ बने रहे। ‘हत्यारे’ को अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। जांच दल के पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतक महिला का नाम लीला ताबियार (36) है। शिक्षिका अरथूना की रहने वाली है।

महिलाओं की ‘सुरक्षा’ पर सवाल

भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं की ‘सुरक्षा’ अपने सबसे निचले स्तर पर है, जिस पर एक बार फिर उंगली उठाई जा रही है। प्रशासन भले ही महिलाओं की सुरक्षा की सिर्फ बातें करता हो, लेकिन वह सिर्फ ‘बातें’ ही हैं। कुछ नहीं किया जा रहा है। राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा और महिलाओं से बलात्कार की कड़ी निंदा की है।

भाजपा शासित राज्यों में बड़े पैमाने पर बलात्कार के आंकड़ों का हवाला देते हुए तृणमूल ने साफ कहा कि बंगाल में महिलाएं सम्मान के साथ रहती हैं। अगर कोई अपराध होता है तो किसी को भी नहीं बख्शा जाता, चाहे अपराधी कोई भी हो। न्याय जल्दी होता है। भाजपा शासित राज्यों में बलात्कारियों को जेल से रिहा कर दिया जाता है और उनके गले में माला डालकर उनका स्वागत किया जाता है।

आंकड़े बताते हैं कि देश भर में महिलाओं के खिलाफ 4,45,256 अपराध दर्ज किए गए हैं। हर घंटे 51 मामले दर्ज किए जाते हैं। इसमें से साल भर में 31,561 बलात्कार हुए हैं। यानी देश में हर दिन औसतन 86 बलात्कार हुए हैं। हर 16 मिनट में एक। हालांकि सजा की दर 27.4 प्रतिशत है। देखा गया है कि भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं की सुरक्षा सबसे कम है। एक साल में राजस्थान में 5399, उत्तर प्रदेश में 3690, मध्य प्रदेश में 3029, महाराष्ट्र में 2904, हरियाणा में 1787, ओडिशा में 1464 बलात्कार के मामले सामने आए।

तृणमूल कांग्रेस का आरोप

तृणमूल कांग्रेस ने साफ आरोप लगाया है कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके चुने हुए प्रतिनिधियों पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सबसे ज्यादा आरोपी हैं। हाथरस से लेकर उन्नाव और कठुआ की घटनाओं तक इस पार्टी ने बलात्कारियों को संरक्षण दिया है। इतना ही नहीं, इसने बलात्कारियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया है। सबूत मौजूद हैं- कौन बलात्कारियों के साथ खड़ा था, किसने इस जघन्य अपराध को बढ़ावा दिया। तृणमूल का आरोप है कि यही वजह है कि भाजपा कभी भी ‘अपराजिता विधेयक’ या ‘बलात्कार विरोधी विधेयक’ को कानून नहीं बनाना चाहती।

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