Ramgarh mountain dispute : सरगुजा जिले के उदयपुर स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले रामगढ़ पर्वत पर चल रहे उत्खनन को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। अडानी समूह की गतिविधियों को लेकर विपक्ष लगातार प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर है। कांग्रेस समेत अन्य दल इसे सांस्कृतिक धरोहर और आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए उत्खनन पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। वहीं बढ़ते जनाक्रोश और विपक्ष के दबाव को देखते हुए भाजपा ने इस विषय पर गंभीरता दिखाते हुए तथ्यात्मक अध्ययन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।

भाजपा ने समिति का गठन करते हुए कहा कि रामगढ़ पर्वत को लेकर विपक्ष जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है। इसलिए वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पार्टी प्रतिनिधि स्थल का दौरा करेंगे और जमीनी हकीकत से अवगत कराएंगे। समिति में पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा को संयोजक बनाया गया है, जबकि पूर्व सांसद व विधायक रेणुका सिंह और भाजपा प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी सदस्य होंगे। यह समिति सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी।

गौरतलब है कि रामगढ़ पर्वत पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां से महाकाव्य रामायण से जुड़े कई संदर्भ जुड़े हैं। उत्खनन के चलते न केवल प्राचीनतम विरासत नाट्यशाला पर संकट बताया जा रहा है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। विपक्ष भाजपा पर अडानी समूह को संरक्षण देने का आरोप लगा रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि तथ्यों के आधार पर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
फिलहाल इस समिति के गठन को राजनीतिक तौर पर भाजपा की “डैमेज कंट्रोल” रणनीति माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सात दिनों में समिति की रिपोर्ट किस दिशा में संकेत करती है और इसका प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।










