Ranchi Protest: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस आंदोलन ने राज्य सरकार और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

प्रशासन ने छात्रों से संवाद की पहल की
आंदोलन के बीच बीती रात रांची जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। प्रशासन की ओर से रांची सदर के एसडीएम कुमार रजत और एडीएम धनंजय कुमार ने आंदोलनकारी अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। अधिकारियों ने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि उनकी चिंताओं को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य छात्रों और सरकार के बीच संवाद स्थापित कर गतिरोध को समाप्त करना बताया गया।

SDM कुमार रजत ने छात्रों को दिया भरोसा
रांची सदर के एसडीएम कुमार रजत ने बातचीत के दौरान कहा कि प्रशासन छात्रों की समस्याओं को समझने और समाधान खोजने के उद्देश्य से उनके बीच पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार यह जानना चाहती है कि भविष्य की परीक्षाओं की तैयारी और भर्ती प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए किस प्रकार के सुधार किए जा सकते हैं। एसडीएम ने प्रदर्शनकारी युवाओं को अपने छोटे भाई बताते हुए विश्वास दिलाया कि उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाएगा और उचित स्तर पर रखा जाएगा।
मांगों पर अड़े छात्र, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
हालांकि प्रशासन की पहल के बावजूद आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर पूरी तरह कायम हैं। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और जब तक सरकार स्पष्ट नीति, समयबद्ध कार्रवाई और लिखित निर्णय नहीं देती, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों ने हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है और इस कारण निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
सरकार ने प्रतिनिधिमंडल से वार्ता का दिया प्रस्ताव
इससे पहले 5 अगस्त को भी एसडीएम कुमार रजत और एडीएम धनंजय कुमार आंदोलन स्थल पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाने का आग्रह किया था ताकि मुख्यमंत्री आवास पर औपचारिक बातचीत की जा सके। बाद में जानकारी सामने आई कि छात्रों, अधिवक्ताओं और विषय विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक प्रतिनिधिमंडल का गठन कर लिया गया है। अब सरकार और प्रतिनिधियों के बीच बैठक होने की तैयारी चल रही है, जिससे समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।

छात्रों की पांच प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा की निष्पक्ष जांच और विवादित परिणामों पर रोक लगाने की मांग शामिल है। इसके अलावा कथित पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की गई है। छात्र JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने, गड़बड़ियों में शामिल अधिकारियों एवं दलालों पर सख्त कार्रवाई करने तथा विवादित परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा निष्पक्ष तरीके से आयोजित कराने की भी मांग कर रहे हैं।
विधानसभा घेराव की तारीख बदली गई
छात्र संगठनों ने पहले 6 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित किया था। हालांकि बाद में परिस्थितियों को देखते हुए इस कार्यक्रम की तारीख बदल दी गई। विधानसभा सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। इसी दिन एक राजनीतिक दल द्वारा अलग कार्यक्रम की घोषणा भी की गई थी, जिससे छात्र आंदोलन के राजनीतिक रूप लेने की आशंका जताई गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए छात्र संगठनों ने रणनीति में बदलाव करते हुए विधानसभा घेराव का कार्यक्रम अब 10 अगस्त को आयोजित करने का निर्णय लिया है।
सरकार और छात्रों की वार्ता पर टिकी निगाहें
फिलहाल झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी यह आंदोलन राज्य की सबसे बड़ी छात्र आवाज बन चुका है। अब सभी की निगाहें सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली बैठक पर टिकी हैं। यदि वार्ता सकारात्मक रहती है तो लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त होने की संभावना बन सकती है। वहीं, यदि छात्रों की प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनती, तो आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।
Read More : Saudi-Yemen Border: हूती हमले से नजरान दहला, 11 नागरिक घायल, यमन में 30 सैनिकों की मौत












