RG Kar Case : पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित आर.जी. कर (RG Kar) अस्पताल रेप और मर्डर केस में पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने एक बार फिर जांच की गति और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ का आरोप है कि मामले में अब तक कोई ऐसी ठोस प्रगति सामने नहीं आई है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हो सके। उनका कहना है कि इतने गंभीर अपराध के बावजूद जांच में अपेक्षित परिणाम नहीं दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
CBI की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
रत्ना देबनाथ ने कहा कि उनके परिवार ने कभी इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग नहीं की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद भी मामले में ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि एजेंसी अपना काम ठीक से नहीं कर पा रही है, तो उसे जांच से हट जाना चाहिए। उनके इस बयान से एक बार फिर आरजी कर मामले की जांच को लेकर बहस तेज हो सकती है।

परिवार पहले भी जता चुका है असंतोष
पीड़िता के माता-पिता पहले भी कई बार जांच की दिशा और उसकी प्रगति को लेकर असंतोष जाहिर कर चुके हैं। परिवार का आरोप है कि जिन लोगों को वे इस अपराध में शामिल मानते हैं, उन्हें अब तक न्याय के कटघरे में नहीं लाया गया है। रत्ना देबनाथ का कहना है कि परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन जांच से जुड़ी स्थिति अब भी उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाई है। परिवार की मुख्य मांग है कि अपराध से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर CBI को मिली थी जांच
आर.जी. कर अस्पताल की घटना के बाद मामले ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया था। जांच को लेकर उठे सवालों के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद अदालत ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का आदेश दिया। तभी से CBI इस मामले की जांच कर रही है। हालांकि, अब पीड़िता की मां ने केंद्रीय एजेंसी की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए जांच के नतीजों को लेकर सवाल उठाए हैं।
मेडिकल कॉलेजों में भ्रष्टाचार जारी रहने का आरोप
रत्ना देबनाथ ने केवल आरजी कर मामले की जांच ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के मेडिकल कॉलेजों में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया है। उनका आरोप है कि राज्य में सरकार बदलने के बावजूद मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि मेडिकल कॉलेजों में भ्रष्टाचार की समस्या अब भी बनी हुई है और पहले से व्यवस्था से जुड़े कुछ लोग अब भी प्रभावशाली स्थिति में मौजूद हैं।

भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलें मिलने का किया दावा
बीजेपी विधायक के मुताबिक, उन्हें अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों की कई फाइलें मिली हैं। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों और शिकायतों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस पूरे मुद्दे को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सामने रखेंगी, ताकि कथित अनियमितताओं की जांच कराई जा सके।
2026 में पनिहाटी सीट से विधायक बनीं रत्ना देबनाथ
रत्ना देबनाथ ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर बीजेपी का दामन थामा था। उनका मानना था कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होने पर न्याय की उम्मीद मजबूत हो सकती है। इसके बाद उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में पनिहाटी सीट से जीत हासिल की और विधायक बनीं। अब जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी उन्होंने आरजी कर मामले को लगातार उठाने का फैसला किया है।
न्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का ऐलान
रत्ना देबनाथ का कहना है कि उनकी प्राथमिकता बेटी को न्याय दिलाना और मेडिकल कॉलेजों में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। उन्होंने जांच एजेंसियों और राज्य सरकार से इन मुद्दों पर गंभीरता दिखाने की मांग की है। अब देखना होगा कि उनके आरोपों और शिकायतों के बाद जांच में क्या प्रगति होती है और मेडिकल संस्थानों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर सरकार क्या कदम उठाती है।


