Russia Supports Trump: नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से ठीक पहले रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदवारी का खुलकर समर्थन किया है। रूसी सरकारी एजेंसी TASS के अनुसार, क्रेमलिन के वरिष्ठ सलाहकार यूरी उशाकोव ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ट्रंप की पहल “सराहनीय” रही है और रूस उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार का पात्र मानता है।

ट्रंप का दावा: “मैंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोका”
डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के प्रति रुझान कोई नया नहीं है। इससे पहले भी उन्हें अब्राहम समझौते के लिए नामांकित किया गया था, जिसने इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच संबंध सुधारने में अहम भूमिका निभाई थी। अब, अपने नए दावों में ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान छह से सात बड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल करने में योगदान दिया, जिनमें भारत-पाकिस्तान तनाव भी शामिल था।

ट्रंप के अनुसार, उन्होंने उस समय हस्तक्षेप किया जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव “परमाणु युद्ध” की कगार पर था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैश्विक शांति के लिए उनके प्रयासों को अब वैश्विक मान्यता मिलनी चाहिए।
पाकिस्तान का समर्थन, भारत का खंडन
पाकिस्तान की ओर से ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए औपचारिक समर्थन दिया गया है। इस्लामाबाद ने उनके प्रयासों को सकारात्मक बताते हुए उन्हें शांति दूत की संज्ञा दी है।
हालांकि, भारत ने ट्रंप के दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने में ट्रंप का कोई प्रत्यक्ष या प्रभावी योगदान नहीं रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि यह द्विपक्षीय मुद्दा है और भारत किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता।
राजनीतिक महत्वाकांक्षा या शांति प्रयास?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह मुहिम एक बार फिर से उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत करने की कोशिश हो सकती है, विशेषकर तब जब वह आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के लिए मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उम्मीदवारी पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। जहां रूस और पाकिस्तान जैसे देश उनके प्रयासों की सराहना कर रहे हैं, वहीं भारत जैसे देश उनके दावों को पूरी तरह खारिज कर चुके हैं। अब देखना होगा कि नोबेल समिति इस पर क्या निर्णय लेती है, लेकिन इतना तय है कि ट्रंप का यह दावा उन्हें फिर से वैश्विक सुर्खियों में ले आया है।











