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Russia-Ukraine war: भूख और लाचारी के बीच घिरे यूक्रेनी सैनिक; ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने बढ़ाई जेलेंस्की की टेंशन

Russia-Ukraine war: चार साल का युद्ध और गहराता मानवीय संकट रूस और यूक्रेन के बीच जारी खूनी संघर्ष को अब चार साल से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन शांति की कोई किरण नजर नहीं आ रही है। युद्ध की विभीषिका के बीच अब यूक्रेनी सेना के भीतर से भूख, भ्रष्टाचार और लाचारी की ऐसी खबरें आ रही हैं जो विचलित करने वाली हैं। जहाँ एक ओर फ्रंटलाइन पर रसद (Logistics) का संकट गहरा गया है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बदलाव के कारण यूक्रेन की मदद पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं।

कूटनीति में बदलाव: ट्रंप का ध्यान ईरान और ग्रीनलैंड की ओर

यूक्रेन के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय अमेरिका की बदलती प्राथमिकताएं हैं। नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिनसे युद्ध रुकवाने की उम्मीद की जा रही थी, उनका ध्यान फिलहाल ईरान के साथ तनाव और ग्रीनलैंड जैसे रणनीतिक मुद्दों पर केंद्रित हो गया है। इस कारण यूक्रेन और रूस के बीच होने वाली संभावित शांति वार्ता ठंडे बस्ते में चली गई है। यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य और मानवीय सहायता में हो रही देरी ने युद्धक्षेत्र में सैनिकों की मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है।

युद्धबंदी का खुलासा: घायल सैनिकों की मौत का मंजर

रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक वीडियो में यूक्रेनी युद्धबंदी एलेक्जेंडर सोतनिवोक ने अपनी सेना की पोल खोल दी है। सोतनिवोक ने बताया कि यूक्रेन की ‘इवैक्युएशन’ (निकासी) व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। यदि कोई सैनिक युद्ध में घायल हो जाता है, तो उसका जीवित बचना केवल तभी संभव है जब वह खुद घिसटकर या चलकर निकासी बिंदु तक पहुँच सके। उन्होंने दर्दनाक खुलासा किया कि कई घायल सैनिक पेड़ों के सहारे मदद के इंतजार में दम तोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें बचाने वाला कोई नहीं होता।

भूख और प्यास: ड्रोन्स के भरोसे आधा अधूरा भोजन

युद्ध के मैदान में तैनात सैनिकों को दुश्मन की गोलियों से ज्यादा अपनी भूख मार रही है। रसद की भारी किल्लत के कारण सैनिकों को कई-कई दिनों तक पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है। सोतनिवोक के अनुसार, कभी-कभी ड्रोन्स के माध्यम से भोजन पहुँचाने की कोशिश की जाती है, लेकिन वह मात्रा इतनी कम होती है कि उससे सैनिकों की भूख नहीं मिटती। पानी और बुनियादी दवाओं की कमी ने फ्रंटलाइन पर लड़ रहे युवाओं का मनोबल पूरी तरह तोड़ दिया है।

जबरन भर्ती और भर्ती केंद्रों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार

यूक्रेन में सैनिकों की घटती संख्या को पूरा करने के लिए अब ‘जबरन भर्ती’ (Forced Mobilization) का सहारा लिया जा रहा है। सोतनिवोक ने बताया कि उन्हें और उनके जैसे कई अन्य लोगों को बिना किसी सैन्य प्रशिक्षण के सीधे मौत के मुँह में झोंक दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने भर्ती कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार का भी पर्दाफाश किया। यह चर्चा आम है कि अधिकारी 15,000 से 16,000 डॉलर लेकर लोगों को भर्ती से छूट दे देते हैं, लेकिन गरीब जनता के पास न तो पैसे हैं और न ही बचने का कोई रास्ता।

रूसी हमलों की तीव्रता और भविष्य की अनिश्चितता

एक तरफ जहाँ यूक्रेनी सेना आंतरिक संकटों से जूझ रही है, वहीं रूस ने अपने हवाई हमलों को और अधिक आक्रामक बना दिया है। हालिया हमलों में रूस ने एक ही रात में 200 से अधिक ड्रोन्स के जरिए यूक्रेन के छह प्रमुख प्रांतों के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। यूक्रेन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी सेना को बिखरने से बचाने की है। दुनिया अब केवल डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रही है, क्योंकि उनकी सक्रियता के बिना इस महायुद्ध का अंत संभव नहीं दिख रहा है।

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