Russia Ukraine Peace
Russia Ukraine Peace: रूस और यूक्रेन के बीच पिछले लगभग चार वर्षों से जारी विनाशकारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आशाजनक कूटनीतिक प्रगति हुई है। इस युद्ध ने न केवल दोनों देशों को भारी क्षति पहुँचाई है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को भी हिलाकर रख दिया है। अब शांति की उम्मीदों को बल देते हुए यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रविवार को एक बड़ी घोषणा की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि रूस, यूक्रेन और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच 4 और 5 फरवरी 2026 को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में एक त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की जाएगी। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘टेलीग्राम’ पर अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि उनकी कूटनीतिक टीम को प्रारंभिक वार्ता की विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूक्रेन अब इस युद्ध के एक ‘वास्तविक और सम्मानजनक’ अंत के लिए गंभीर बातचीत की मेज पर आने को पूरी तरह तैयार है।
अबू धाबी में होने वाली यह शांति वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन निरंतर प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है, जिसके तहत वे दोनों देशों को एक समझौते पर सहमत करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस बैठक को लेकर व्हाइट हाउस या क्रेमलिन की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संकेत सकारात्मक हैं। रूस के मुख्य वार्ताकार किरिल दिमित्रिएव ने कूटनीतिक माहौल को उत्साहजनक बताया है। हाल ही में फ्लोरिडा में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ उनकी बैठक को इस शांति वार्ता की आधारशिला माना जा रहा है।
भले ही बातचीत की तैयारी हो रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी पेचीदा है। वार्ता में सबसे बड़ी बाधा उन क्षेत्रों का भविष्य है जिन पर वर्तमान में रूसी सेना का कब्जा है। यूक्रेन का औद्योगिक केंद्र कहे जाने वाले डोनबास क्षेत्र को लेकर दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद है। यूक्रेन की स्पष्ट मांग है कि रूस को अपनी सेना उन सभी इलाकों से पूरी तरह हटानी होगी जिन्हें युद्ध के दौरान कब्जाया गया है। दूसरी ओर, रूस इन क्षेत्रों को अपने रणनीतिक हितों और सुरक्षा के लिए अनिवार्य मानता है, जिससे गतिरोध बना हुआ है।
फरवरी 2022 में शुरू हुए इस युद्ध ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट और खाद्य असुरक्षा पैदा कर दी है। ट्रंप प्रशासन पिछले लगभग एक साल से गुप्त और खुले तौर पर कूटनीतिक चैनलों के जरिए इस संघर्ष को रोकने की कोशिश कर रहा था। अबू धाबी की बैठक इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बैठक को बहुत उम्मीदों के साथ देख रहा है, क्योंकि यह तय करेगी कि क्या पश्चिमी एशिया की मध्यस्थता में यह युद्ध कूटनीतिक समझौतों के जरिए खत्म होगा या विनाश का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
अगले सप्ताह होने वाली इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अबू धाबी में क्षेत्रीय दावों पर कोई मध्यम मार्ग निकल आता है, तो यह सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। हालांकि, दोनों देशों के बीच दशकों पुराने अविश्वास को देखते हुए यह राह आसान नहीं है। फिर भी, अमेरिका की सक्रिय भागीदारी और जेलेंस्की का नरम रुख यह संकेत दे रहा है कि युद्ध की विभीषिका झेल रहे लोगों के लिए शांति अब बहुत दूर नहीं है।
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