Sai cabinet meeting : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र से पहले राज्य सरकार ने 11 जुलाई को कैबिनेट बैठक बुलाने का फैसला लिया है। यह बैठक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी। सुबह 11:30 बजे शुरू होने वाली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए जा सकते हैं। साथ ही, विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किए जाने वाले विधेयकों पर भी मंत्रिपरिषद के बीच गहन मंथन होगा।
विधानसभा सत्र की तैयारी में जुटी सरकार
छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 14 जुलाई से प्रारंभ होगा। इस बार का सत्र हंगामेदार रहने की संभावना है, क्योंकि विधायकों ने अब तक करीब 1000 सवाल तैयार कर लिए हैं। खास बात यह है कि सिर्फ विपक्षी दल ही नहीं, सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक भी सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में हैं। ऐसे में सरकार इस सत्र को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती, और कैबिनेट बैठक में सभी प्रस्तावों व विधेयकों को अंतिम रूप दिए जाने की योजना है।
पिछली बैठक में लिए गए थे अहम फैसले
इससे पहले 30 जून को हुई कैबिनेट बैठक में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। इनमें छत्तीसगढ़ पेंशन फंड के गठन को मंजूरी, कर्मचारियों की रिटायरमेंट पेंशन दायित्वों के वित्तीय प्रबंधन, और ‘कृषक उन्नति योजना’ का विस्तार शामिल था। अब 11 जुलाई को होने वाली बैठक में इन योजनाओं की आगे की दिशा तय की जा सकती है।
विधेयकों पर मंत्रिपरिषद में गहन चर्चा संभावित
मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में होने वाली आगामी बैठक में सत्र में पेश होने वाले विधेयकों को लेकर प्रस्तावों की समीक्षा और मंजूरी दी जा सकती है। इन विधेयकों में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासनिक सुधार जैसे विषयों से जुड़े मसले प्रमुख होंगे। सरकार चाहती है कि सत्र में पेश किए जाने वाले सभी दस्तावेज और प्रस्ताव पूर्ण रूप से तैयार और स्पष्ट हों, ताकि विपक्ष के तीखे सवालों का सटीक उत्तर दिया जा सके।
राजनीतिक रणनीति और तालमेल भी होगा एजेंडे में
कैबिनेट बैठक के दौरान यह भी संभव है कि सत्तापक्ष के विधायकों को रणनीतिक दिशा-निर्देश दिए जाएं, ताकि सत्र के दौरान पार्टी की एकजुटता बनी रहे और सरकारी योजनाओं की बेहतर प्रस्तुति की जा सके। आगामी दिनों में विधायकों और मंत्रियों की बैठकों की श्रृंखला भी जारी रह सकती है। साय सरकार के लिए यह मानसून सत्र एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है, जहां नीतिगत निर्णयों की पारदर्शिता, विधायकों की जवाबदेही और जनहित में लिए गए फैसलों की प्रभावशीलता का सीधा मूल्यांकन विधानसभा पटल पर होगा। ऐसे में 11 जुलाई की कैबिनेट बैठक न केवल विधायी दिशा तय करेगी, बल्कि राजनीतिक संतुलन साधने का अवसर भी बनेगी।