Samay Raina News : प्रसिद्ध कॉमेडियन समय रैना को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। ‘इंडिया गॉट लेटेंट’ शो से जुड़े विवाद के मामले में सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने समय रैना पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान समय रैना के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि समय रैना ने अदालत के निर्देशों का उचित पालन नहीं किया है और वे मामले को घुमाने का प्रयास कर रहे हैं। कोर्ट ने उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए यह टिप्पणी भी की कि यह चिंता का विषय है कि वे किस प्रकार के ‘यूथ आइकन’ हैं।

अदालत के आदेश की अवहेलना और एसएमए फाउंडेशन का मुद्दा
सुनवाई के दौरान क्योर एसएमए फाउंडेशन की वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना ने न्यायालय के पूर्व आदेशों का पूरी तरह उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद समय रैना ने न तो एसएमए फाउंडेशन से संपर्क किया और न ही इस बीमारी से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए कोई सार्थक कदम उठाए। वकील ने कहा कि एक तरफ समय रैना अपने शो जारी रखे हुए हैं, लेकिन दूसरी तरफ उन्होंने अदालत द्वारा निर्देशित जिम्मेदारी को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। इसके अलावा, फाउंडेशन की ओर से यह भी कहा गया कि अब तक समय रैना की ओर से कोई भी वास्तविक या स्पष्ट माफी नहीं मांगी गई है।

‘यूथ आइकन’ पर जजों और सॉलिसिटर जनरल की टिप्पणी
अदालत की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बेंच ने समय रैना की छवि और उनके प्रभाव पर तीखी टिप्पणी की। बेंच ने पूछा कि वे किस तरह के यूथ आइकन हैं, यह सोचकर वास्तव में चिंता होती है। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हमारे देश के युवाओं के पास समय रैना से कहीं अधिक बेहतर और अनुकरणीय आइकन मौजूद हैं। उन्होंने अदालत का ध्यान समय रैना की हालिया टिप्पणियों और उनके व्यवहार की ओर आकर्षित किया, जिस पर उन्होंने अदालत से संज्ञान लेने का आग्रह किया।
जुर्माने की राशि में कटौती और भविष्य की चेतावनी
उल्लेखनीय है कि समय रैना पर इससे पहले 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना प्रस्तावित किया गया था, लेकिन उनके वकील की विशेष आग्रह और दलीलों के बाद अदालत ने इसे कम करके 3 लाख रुपये कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना को यह राशि दो सप्ताह के भीतर जमा करने का सख्त निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि कॉमेडियनों ने अपने आचरण में सुधार लाने के लिए अब तक धरातल पर क्या प्रयास किए हैं। अदालत के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर अब कानूनी दायरा और अधिक सतर्क हो गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समय रैना अदालत के इस आदेश का पालन किस प्रकार करते हैं।
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