Karnataka News : कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने आधुनिक समाज में भी व्याप्त अंधविश्वास की जड़ों को उजागर कर दिया है। 21वीं सदी में जहाँ विज्ञान और तर्क की प्रधानता है, वहीं एक 65 वर्षीय महिला द्वारा अदालत के भीतर किया गया ‘काला जादू’ चर्चा का विषय बन गया है। मंजुला नामक इस महिला पर आरोप है कि उसने कोर्ट में चल रहे अपने व्यक्तिगत मामले में फैसला अपने पक्ष में करवाने के लिए जज के चैंबर में जाकर टोना-टोटका किया। इस घटना ने न केवल आम लोगों को हैरान कर दिया है, बल्कि न्यायिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीसीटीवी फुटेज से हुआ सनसनीखेज खुलासा
यह घटना तब प्रकाश में आई जब चिक्कबल्लापुर की फर्स्ट एडिशनल सीनियर सिविल जज एवं जेएमएफसी कोर्ट के प्रशासनिक अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की। फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि महिला बड़ी शातिराना तरीके से जज के चैंबर में दाखिल हुई और उनकी कुर्सी के पास पहुँचकर मंत्र पढ़ते हुए सफेद सरसों के दाने छिड़के। यह हरकत कोर्ट की मर्यादा के विरुद्ध थी। जब मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नेत्रा ने इस संदिग्ध गतिविधि को देखा, तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद एफआईआर दर्ज कर जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।

पुलिस पूछताछ में महिला ने कबूला जुर्म
पुलिस द्वारा की गई सख्ती से पूछताछ के दौरान मंजुला ने अपनी करतूत को स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि वह अपने लंबित केस में न्यायपूर्ण फैसला न पाकर परेशान थी और उसे लगा कि काला जादू करने से जज का हृदय परिवर्तन हो जाएगा और फैसला उसके हक में आएगा। अंधविश्वास की पराकाष्ठा यह थी कि उसने बिना किसी हिचकिचाहट के कोर्ट परिसर की पवित्रता को दांव पर लगा दिया। पुलिस ने महिला के खिलाफ ‘कर्नाटक अमानवीय कुप्रथाओं और काला जादू की रोकथाम एवं उन्मूलन अधिनियम, 2017’ के तहत मामला दर्ज कर लिया है, जो कि ऐसे अपराधों के लिए सख्त कानूनी प्रावधान करता है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत और जांच का दायरा
कानूनी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी महिला मंजुला को स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अब पुलिस इस पहलू पर भी जांच कर रही है कि क्या महिला ने यह सब अकेले किया है या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या किसी तांत्रिक का हाथ है जिसने उसे इस कुकृत्य के लिए उकसाया था। इस घटना के बाद चिक्कबल्लापुर कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजामों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी संदेहास्पद गतिविधि को रोका जा सके।
अंधविश्वास के खिलाफ समाज को सबक
यह मामला इस बात का कड़वा सच है कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में कानून पर भरोसा करने के बजाय अंधविश्वास और टोने-टोटकों का सहारा लेने की प्रवृत्ति मौजूद है। एक न्यायिक संस्थान में इस तरह का कृत्य न केवल कानून का अपमान है, बल्कि यह उस हताशा को भी दर्शाता है जो व्यक्ति को तर्कहीन रास्तों पर ले जाती है। चिक्कबल्लापुर की यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि अंधविश्वास किसी भी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि स्वयं के लिए और बड़ी मुसीबत का कारण बन सकता है। पुलिस की आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि इस अंधविश्वासी जाल के पीछे और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं।
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