Tej Pratap Yadav Rahul Gandhi
Tej Pratap Yadav Rahul Gandhi: बिहार की राजनीति में अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर ‘जनशक्ति जनता दल’ के संस्थापक तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने सीधे तौर पर राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कांग्रेस को संभालने के लिए प्रियंका गांधी ही एकमात्र सक्षम विकल्प हैं। तेज प्रताप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष के भीतर आपसी तालमेल और नेतृत्व को लेकर पहले से ही कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दिखावे की राजनीति से दल नहीं चलते, बल्कि इसके लिए दूरदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता की आवश्यकता होती है।
पटना में मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस नेतृत्व पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी में अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की छवि दिखाई देती है, जो पार्टी को सही दिशा में ले जाने में सक्षम हैं। तेज प्रताप ने राहुल गांधी की हालिया गतिविधियों पर तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस को सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं। राहुल गांधी से पार्टी चलने वाली नहीं है। केवल पदयात्राएं करने या बुलेट पर बैठने से राजनीति नहीं होती।” उन्होंने आगे सवाल किया कि जब बिहार में सत्ता समीकरण बदल गए और नीतीश कुमार अलग होकर राजनीति से हट गए, तब राहुल गांधी का असली मकसद क्या था?
तेज प्रताप यादव की यह नाराजगी राहुल गांधी के उस बयान के बाद सामने आई है, जिसमें राहुल ने जद(यू) प्रमुख नीतीश कुमार को ‘समझौता किया हुआ नेता’ करार दिया था। हाल ही में बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है, जहां नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद भाजपा के सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। तेज प्रताप ने राहुल के इस नजरिए को खारिज करते हुए इसे उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता बताया। उनके अनुसार, राहुल गांधी जमीनी हकीकत को समझने के बजाय केवल प्रतीकात्मक राजनीति में उलझे हुए हैं।
राहुल गांधी के नेतृत्व पर केवल बाहरी दलों के नेता ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के पूर्व सहयोगी भी सवाल उठाते रहे हैं। इसी साल जनवरी में पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने भी पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस में सभी महत्वपूर्ण निर्णय केवल राहुल गांधी की पसंद-नापसंद के आधार पर लिए जाते हैं। शकील अहमद का आरोप था कि राहुल गांधी उन वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करने में असहज महसूस करते हैं जो उन्हें अपना सर्वमान्य ‘बॉस’ नहीं मानते। यह आंतरिक असंतोष पार्टी की सांगठनिक मजबूती के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
शकील अहमद ने अपने बयानों में यह भी संकेत दिया था कि राहुल गांधी अपने परिवार की विरासत के कारण स्वयं को अन्य नेताओं से श्रेष्ठ समझते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी यूथ कांग्रेस और NSUI जैसे अनुषंगिक संगठनों का उपयोग करके उन अनुभवी नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो पार्टी की जड़ों से जुड़े रहे हैं। तेज प्रताप यादव के हालिया बयान ने इसी जख्म को फिर से हरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से पार्टी की छवि एक ‘तानाशाही’ ढांचे वाली संस्था के रूप में बनती है, जहां वरिष्ठता का सम्मान कम हो रहा है।
तेज प्रताप यादव के इस बयान ने कांग्रेस के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर दी है। अब विपक्षी गठबंधन के सहयोगी भी खुलेआम प्रियंका गांधी को कमान सौंपने की वकालत कर रहे हैं। प्रियंका गांधी की तुलना इंदिरा गांधी से करना और उन्हें पार्टी की ‘लाइफलाइन’ बताना यह दर्शाता है कि राहुल गांधी के नेतृत्व के प्रति अब सहयोगियों का भरोसा डगमगा रहा है। आने वाले समय में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग और तेज हो सकती है। फिलहाल, तेज प्रताप के इन कड़े शब्दों ने बिहार से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
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