Sarvapitri Amavasya 2025 Date and Importance: श्राद्ध पक्ष अब अपने अंतिम चरण में है और सभी की नजरें सर्वपितृ अमावस्या पर टिकी हैं। यह वह विशेष तिथि है जब ज्ञात और अज्ञात पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इस बार सर्वपितृ अमावस्या 21 सितंबर 2025, शनिवार को पड़ रही है।
इस अमावस्या को आश्विन अमावस्या, बड़मावस, पितृ विसर्जन अमावस्या और दर्श अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन पितृलोक से आए पूर्वजों की विदाई का दिन होता है, जब वे तृप्त होकर पुनः अपने लोक को लौटते हैं।
तिथि प्रारंभ: 20 सितंबर 2025, रात 12:16 बजे
तिथि समाप्त: 21 सितंबर 2025, रात 1:23 बजे
श्राद्ध मुहूर्त: 21 सितंबर को सूर्योदय से लेकर दिनभर
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, यह तिथि श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
शुभ योग – सायं 7:52 बजे तक रहेगा, जो श्राद्ध और तर्पण के लिए अति उत्तम है।
शुक्ल योग – शुभ योग के बाद शुरू होगा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा।
सर्वार्थ सिद्धि योग – सुबह 9:32 बजे से पूरी रात बना रहेगा। यह योग शुभ कार्यों में सफलता दिलाता है।
शिववास योग – भगवान शिव कैलाश पर विराजमान रहते हैं, इस समय तर्पण करने से पितृ दोष का नाश होता है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें – बिना साबुन का प्रयोग करें।
साफ-सुथरे कपड़े पहनें और पितरों के लिए सात्विक भोजन तैयार करें।
श्राद्ध विधि अनुसार तर्पण करें, पिंडदान करें और ब्राह्मण भोजन कराएं।
चार दीपक जलाएं – सरसों तेल के दीपक घर की चौखट पर रखें।
एक दीपक और एक लोटा जल लेकर पितरों का स्मरण करें।
ब्राह्मणों को दक्षिणा, वस्त्र और अन्न का दान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है। भोजन कौवे, गाय और कुत्ते को भी अर्पित करें।
इस दिन उन पितरों का भी श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती।
यह दिन सभी भूले-बिसरे पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष महत्व रखता है।
ब्रह्म पुराण के अनुसार, उचित समय और विधि से किया गया श्राद्ध पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करता है।
पितरों की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, जो संतान बाधा, विवाह में रुकावट, धन हानि आदि का कारण होता है।
मन को शांति और संतुलन प्राप्त होता है।
जीवन में रुके हुए कार्य बनने लगते हैं और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
21 सितंबर 2025 को आने वाली सर्वपितृ अमावस्या आत्मिक शुद्धि और पितृ संतुष्टि का दिव्य अवसर है। इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक श्राद्ध करने से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।
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