SCO Summit 2025: तियानजिन (चीन) में आयोजित SCO समिट 2025 वैश्विक कूटनीति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बनकर उभरा। इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही मंच पर नजर आए। तीनों नेताओं की मौजूदगी ने न सिर्फ SCO (शंघाई सहयोग संगठन) की अहमियत को रेखांकित किया, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी गहरा प्रभाव डाला।

पीएम मोदी का चीन दौरा: 7 साल बाद ऐतिहासिक वापसी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह सात साल बाद चीन दौरा था और दस महीनों में शी जिनपिंग से दूसरी मुलाकात। इससे पहले उनकी मुलाकात 2024 के ब्रिक्स सम्मेलन (कजान, रूस) में हुई थी। ग्रुप फोटो सेशन के दौरान शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन (Peng Liyuan) ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं के चेहरे पर मुस्कान और सौहार्द के संकेत स्पष्ट थे।

वैश्विक शक्ति संतुलन पर असर
इस समिट की खास बात यह रही कि अमेरिका को छोड़कर सभी प्रमुख एशियाई शक्तियां एक मंच पर थीं। ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ के बाद यह मुलाकात और अधिक महत्व रखती है। जानकारों का मानना है कि भारत-रूस-चीन के इस त्रिकोण की कूटनीतिक बातचीत ग्लोबल ऑर्डर को नया आकार दे सकती है। भारत ने SCO समिट के दौरान मालदीव, नेपाल सहित अन्य देशों के नेताओं से भी द्विपक्षीय चर्चा की, जिससे भारत की ‘Neighbourhood First’ नीति को भी मजबूती मिली।
अमेरिका की चिंता: भारत-चीन नजदीकियां और रूसी तेल
अमेरिका लगातार भारत-रूस के बढ़ते संबंधों को लेकर चिंता जता रहा है। भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका ने आपत्ति जताई थी। लेकिन भारत ने साफ किया कि यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों पर आधारित है और इससे तेल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिली है।
भारत ने जोर देकर कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देगा, और रूस से तेल खरीद जारी रखेगा।
क्या सुलझेंगे भारत-चीन के कोर मुद्दे?
हालांकि SCO मंच पर मोदी-जिनपिंग की गर्मजोशी से मुलाकात को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन जानकारों का मानना है कि असली चुनौती सीमा विवाद, पाकिस्तान को चीन का समर्थन और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दों को सुलझाने में है। यदि इन मुद्दों पर प्रगति होती है, तो यह बैठक वास्तव में एक माइलस्टोन साबित हो सकती है।
SCO समिट 2025 न सिर्फ क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने वाला मंच था, बल्कि यह बैठक भारत, चीन और रूस के बीच जटिल रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। ग्लोबल डिप्लोमेसी के इस नए चैप्टर पर अब पूरी दुनिया की नजर है।
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