Rajya Sabha Oath
Rajya Sabha Oath : भारतीय लोकतंत्र के उच्च सदन, राज्यसभा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण गरिमामयी समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के दिग्गज नेता शरद पवार सहित कुल 19 नवनिर्वाचित और दोबारा चुने गए सदस्यों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस समारोह का सबसे भावुक और चर्चा का विषय शरद पवार का अंदाज रहा, जो स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए व्हीलचेयर पर बैठकर संसद पहुंचे। उनके इस जज्बे को सदन में मौजूद सभी सदस्यों ने सराहा। यह शपथ ग्रहण समारोह राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिन्होंने सभी नए सदस्यों का स्वागत किया और उन्हें संसदीय मर्यादाओं के पालन की सीख दी।
सोमवार को शपथ लेने वाले इन 19 सांसदों में देश के विभिन्न कोनों का प्रतिनिधित्व देखने को मिला। क्षेत्रीय विविधता को दर्शाते हुए, शपथ लेने वालों में 5 सदस्य महाराष्ट्र से, 3 सदस्य ओडिशा से, 6 सदस्य तमिलनाडु से और 5 सदस्य पश्चिम बंगाल से शामिल थे। उल्लेखनीय है कि 16 मार्च 2026 को देश के 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई थी। इस प्रक्रिया के पहले चरण के तहत आज 19 सांसदों ने शपथ ली है, जबकि शेष 18 सांसदों का शपथ ग्रहण आने वाले दिनों में निर्धारित है। इन नए सदस्यों के आगमन से उच्च सदन में विभिन्न राजनीतिक दलों की शक्ति संरचना में भी बदलाव देखने को मिलेगा, जो आगामी विधायी कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सांसदों के इस शपथ ग्रहण का समय बेहद रणनीतिक है, क्योंकि केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल 2026 से संसद का एक विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। इस सत्र का मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में महत्वपूर्ण संशोधनों से जुड़ा है। सरकार इस ऐतिहासिक कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए प्रावधानों पर चर्चा करना चाहती है। विशेष सत्र बुलाने का उद्देश्य इस संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाले विषय पर विस्तार से बहस करना और इसे सर्वसम्मति से पारित कराना है। नवनिर्वाचित सांसदों के लिए यह सत्र उनके कार्यकाल की पहली बड़ी परीक्षा और अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
महिला आरक्षण को सही मायने में लागू करने के लिए सरकार एक बड़े सुधार की योजना पर काम कर रही है। वर्तमान में लोकसभा की सीटों की संख्या 543 है, जिसे बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है। सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की इस बढ़ोतरी के पीछे तर्क यह है कि बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व को संतुलित किया जा सके। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है, तो नई व्यवस्था के तहत 816 सीटों में से 273 सीटें (कुल सीटों का एक-तिहाई) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कदम भारतीय राजनीति के इतिहास में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने वाला अब तक का सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है।
बता दें कि महिला आरक्षण विधेयक की नींव साल 2023 के विशेष सत्र के दौरान रखी गई थी, जब सरकार ने इसे आधिकारिक तौर पर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से पेश किया था। तब से लेकर अब तक इस बिल को लेकर देशव्यापी चर्चाएं होती रही हैं। अब 2026 के इस विशेष सत्र में, सीटों के परिसीमन और आरक्षण के तकनीकी पहलुओं पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है। सरकार का प्रयास है कि आगामी आम चुनावों से पहले इस कानून के सभी तकनीकी पेंच सुलझा लिए जाएं ताकि जमीनी स्तर पर महिलाओं को उनका हक मिल सके। संसद का आगामी सत्र न केवल संख्या बल के लिहाज से, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
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