Share Market Crash
Share Market Crash: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के उन्माद ने इस साल होली के रंगों को फीका कर दिया है। बुधवार, 4 मार्च को जब देश के अधिकतर हिस्सों में होली का उत्सव मनाया जा रहा था, ठीक उसी समय भारतीय शेयर बाजार में सुनामी जैसी गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गए। हालांकि 3 मार्च को होली के उपलक्ष्य में बाजार बंद था, लेकिन बुधवार को कारोबार शुरू होते ही वैश्विक संकेतों ने दलाल स्ट्रीट पर डर का माहौल पैदा कर दिया। सेंसेक्स में जहाँ 1750 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं निफ्टी भी 500 से अधिक अंकों के गोते लगाता नजर आया।
यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है जब भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दौर थमता नहीं दिख रहा है। बीते तीन दिनों के भीतर निवेशकों को कुल 20 लाख करोड़ रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। गिरावट का यह सिलसिला केवल भारत तक सीमित नहीं है; एशियाई बाजारों में भी हाहाकार मचा हुआ है। दक्षिण कोरिया का ‘कोस्पी’ सूचकांक करीब 8 फीसदी तक गिर गया, जबकि अमेरिकी बाजारों में आई गिरावट ने भारतीय निवेशकों के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है।
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान 1,795.65 अंक गिरकर 78,443.20 के स्तर पर आ गया। सोमवार को सेंसेक्स 80,238.85 पर बंद हुआ था, जो बुधवार सुबह भारी अंतर के साथ 78,528.82 पर खुला। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। निफ्टी 550 अंकों की गिरावट के साथ 24,315.45 के निचले स्तर तक चला गया। बाजार में मची इस अफरा-तफरी से हर सेक्टर के शेयरों में लाल निशान देखने को मिला।
बाजार में इस गिरावट का सबसे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ता तनाव है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच संघर्ष चरम पर है। इजरायल द्वारा तेहरान और बेरूत पर किए गए नए हमलों ने आग में घी डालने का काम किया है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीद जताई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अनिश्चितता निवेशकों को सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने पर मजबूर कर रही हैं।
शेयर बाजार के साथ-साथ मुद्रा बाजार से भी बुरी खबर आई है। बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 66 पैसे टूटकर 92.15 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर पहुँच गया। डॉलर इंडेक्स में मजबूती और युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई ने रुपए की कमर तोड़ दी है। कमजोर रुपए की वजह से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से अपनी पूंजी तेजी से बाहर निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने भी आग लगाने का काम किया है। मंगलवार को कच्चे तेल के दाम करीब 10 फीसदी तक बढ़ गए थे। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से तेल की सप्लाई चेन (Shipment) बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है, जो सीधे तौर पर वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।
सोमवार को बाजार बंद होने के समय बीएसई का कुल मार्केट कैप 4,56,90,693.19 करोड़ रुपए था, जो बुधवार को घटकर लगभग 4.48 लाख करोड़ के आसपास आ गया। सीधे शब्दों में कहें तो चंद घंटों के कारोबार में ही निवेशकों की गाढ़ी कमाई का 9 लाख करोड़ रुपए बाजार की भेंट चढ़ गया। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि जब तक जियोपॉलिटिकल हालात नहीं सुधरते, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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