Shoaib Akhtar के भाई के जनाजे पर विवाद, तस्वीरों में दिखे विवादित चेहरे, उठे कई सवाल

Shoaib Akhtar : पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद अख्तर के निधन और उनके अंतिम संस्कार के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 24 जून को शाहिद अख्तर के इंतकाल के बाद उन्हें इस्लामाबाद के एच-8 कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस शोक सभा के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने न केवल खेल जगत बल्कि सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। वीडियो में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के उपप्रमुख सैफुल्लाह कसूरी और संगठन के कई अन्य वरिष्ठ सदस्यों की मौजूदगी साफ देखी जा सकती है। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के खुलेआम सक्रिय होने और उन्हें मिलने वाले सामाजिक संरक्षण के गंभीर मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा किया है।

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आतंकी फ्रंट और पीएमएमएल की भूमिका पर गहराती चिंता

वायरल वीडियो में न केवल लश्कर के आतंकी नजर आए, बल्कि पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के अध्यक्ष इनाम उर रहमान की उपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि PMML मूलतः लश्कर-ए-तैयबा का ही एक राजनीतिक चेहरा है। इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी हाफिज सईद ने तब गठित किया था, जब उसके पूर्ववर्ती संगठनों जैसे जमात-उद-दावा (JuD) और मिल्ली मुस्लिम लीग (MML) पर वैश्विक और घरेलू प्रतिबंध लगाए गए थे। आतंकवाद के नाम पर प्रतिबंधित समूहों का इस तरह राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान की मुख्यधारा में इनका प्रभाव अभी भी बना हुआ है।

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सैफुल्लाह कसूरी: भारत विरोधी जहर उगलने वाला एक कुख्यात चेहरा

लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी का नाम भारत के लिए कोई नया नहीं है। कसूरी को भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान देने और आतंकी गतिविधियों को शह देने के लिए जाना जाता है। अप्रैल महीने में पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले के बाद भी कसूरी के भड़काऊ भाषण सुर्खियों में थे, जिसमें 26 पर्यटकों की जान गई थी। भारत की ओर से की गई कड़ी प्रतिक्रिया, जिसमें सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे सैन्य कदम शामिल थे, ने कसूरी के आतंकी नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुँचाया था। उस ऑपरेशन में मुरीदके स्थित लश्कर का मुख्यालय और कई अन्य आतंकी ठिकाने तबाह कर दिए गए थे।

भारत के खिलाफ लगातार धमकियां और सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती

इसके बावजूद, सैफुल्लाह कसूरी लगातार भारत को नापाक धमकियां दे रहा है। वह समुद्री रास्ते से मुंबई जैसे बड़े आतंकी हमले को दोहराने की गीदड़ भभकियां देता रहता है। फरवरी माह में ही एक वीडियो सामने आया था जिसमें उसने भारत के खिलाफ सीधे युद्ध की चेतावनी दी थी और निराधार आरोप लगाते हुए भारत पर “वॉटर टेररिज्म” का दाग लगाने की कोशिश की थी। शाहिद अख्तर के जनाजे में उसकी उपस्थिति केवल एक शोक यात्रा में भाग लेना नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि पाकिस्तान की धरती पर प्रतिबंधित आतंकवादी अभी भी सुरक्षित हैं और समाज में पूरी धमक के साथ घूम रहे हैं।

सुरक्षा विश्लेषकों की राय और पाकिस्तान का दोहरा चरित्र

विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी समूहों के लिए अभी भी ऑपरेशनल स्पेस मौजूद है। हालांकि वैश्विक दबाव में पाकिस्तान सरकार इन संगठनों पर प्रतिबंध का ढोंग रचती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। लश्कर के कमांडरों का इस तरह खुलेआम सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखना पाकिस्तान के उस दोहरे चरित्र को उजागर करता है, जिसमें वह एक तरफ शांति की बात करता है और दूसरी तरफ आतंकवादियों को संरक्षण देता है। यह स्थिति भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से निरंतर चिंता का विषय बनी हुई है।

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Chandan Das

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