SIR 2.0: चुनाव आयोग ने स्पेशल समरी रिविजन (SIR 2.0) के दूसरे चरण का ऐलान कर दिया है। इस बार मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनसे मतदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब लोगों को Enumeration Form भरते समय कागज नहीं दिखाना होगा, यानी पहचान से जुड़ी दस्तावेज़ी प्रक्रिया को सरल बना दिया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि SIR 2.0 का दूसरा चरण 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 तक चलेगा। इसके बाद 9 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची जारी की जाएगी और 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
इस चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है।
आयोग के अनुसार, इस चरण में करीब 51 करोड़ मतदाता शामिल होंगे। यह प्रक्रिया उन राज्यों में की जा रही है जहां पिछला गहन पुनरीक्षण (SIR 1.0) पूरा हो चुका है और मतदाता सूचियों के अद्यतन की आवश्यकता थी। चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि कोई भी पात्र मतदाता छूटे नहीं और कोई अयोग्य व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
इस बार SIR प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव यही है कि कागजों की जांच अब हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं होगी।आयोग ने बताया कि बिहार के अनुभव से सीख लेते हुए Enumeration Form भरते समय कागज जमा करने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। अब यदि किसी मतदाता का नाम पुराने और नए दोनों मतदाता सूची में सही तरह से मैप हो जाता है, तो उसे कोई दस्तावेज़ दिखाने की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ उन्हीं मामलों में दस्तावेज मांगे जाएंगे, जिनका नाम पुरानी या नई सूची में नहीं मिलता, याजिनके माता-पिता का नाम भी सूची में मेल नहीं खाता।ऐसे लोग 12 स्वीकृत दस्तावेज़ों (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि) में से किसी एक के ज़रिए अपनी पहचान प्रमाणित कर सकेंगे।
बिहार से मिले फीडबैक के आधार पर इस बार आधार कार्ड को पहचान दस्तावेज़ों की सूची में शामिल किया गया है। साथ ही आयोग ने डिजिटल सुविधा बढ़ाने के लिए स्कैनिंग ऑप्शन भी जोड़ा है, ताकि मतदाता मोबाइल या वेबसाइट से अपने दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड कर सकें।
बिहार में पिछले SIR के दौरान कई जगह Deduplication (नाम दो बार दर्ज होना) की समस्या सामने आई थी। इस बार आयोग ने उन्नत सॉफ्टवेयर की मदद से उस समस्या को हल कर लिया है।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा,“लोगों से अपील है कि वे केवल एक ही जगह से एन्युमेरेशन फॉर्म भरें। दो जगह से फॉर्म भरने वालों पर कार्रवाई की जा सकती है।”
आयोग ने स्पष्ट किया कि इस बार असम में SIR प्रक्रिया नहीं चलेगी।मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि असम में NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) की प्रक्रिया पहले से चल रही है, और नागरिकता जांच लगभग पूरी होने वाली है। इसलिए वहां मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण अलग तारीख पर होगा।ज्ञानेश कुमार ने कहा“असम के लिए अलग पुनरीक्षण आदेश जारी किए जाएंगे। वहां नागरिकता अधिनियम के विशेष प्रावधान लागू हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी जारी है।”
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने SIR प्रक्रिया पर कुछ आपत्तियां जताई थीं। इस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि “निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के बीच कोई टकराव नहीं है। दोनों अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। राज्य सरकार का दायित्व है कि आयोग को आवश्यक कर्मी उपलब्ध कराए।”
आयोग ने बताया कि प्रत्येक राज्य के लिए कट-ऑफ डेट उसके पिछले SIR की तिथि होगी। दिल्ली में अंतिम गहन पुनरीक्षण 2008 में हुआ था, उत्तराखंड में 2006 में,जबकि बिहार में 2003 की मतदाता सूची को आधार माना गया था।इन पुरानी सूचियों को ही अब नई मतदाता सूची के साथ मैपिंग के लिए उपयोग किया जा रहा है।
चुनाव आयोग की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर मतदाता अपने नाम की स्थिति खुद देख सकते हैं। आयोग ने बताया कि अब तक 60-70% लोगों का नाम सफलतापूर्वक पुराने और नए रिकॉर्ड से मिलान हो चुका है।
SIR 2.0 चुनाव आयोग का अब तक का सबसे आधुनिक और तकनीक-आधारित पुनरीक्षण अभियान है। “कागज नहीं दिखाना होगा” नीति से न सिर्फ प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि पारदर्शिता और सटीकता भी बढ़ेगी।बिहार की सीख और डिजिटल सुधारों के साथ, यह पहल मतदाता सूची को और अधिक भरोसेमंद बनाएगी ताकि हर योग्य मतदाता को मिले उसका लोकतांत्रिक अधिकार।
Read More : Cyclone Montha: आज काकीनाडा तट से टकराएगा तूफान, आंध्र-ओडिशा में रेड अलर्ट जारी
IPL 2026 CSK vs MI: आईपीएल 2026 के सबसे प्रतीक्षित मुकाबलों में से एक 'एल…
West Bengal Election : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो…
Jhansi Love Affair : उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने…
Sarai Rohilla Murder : देश की राजधानी दिल्ली के सराय रोहिल्ला इलाके में शनिवार को…
Karanvir Bohra Journey : एकता कपूर के कालजयी धारावाहिक 'कसौटी जिंदगी की' से घर-घर में…
Odisha Bank Skeleton Case : ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष…
This website uses cookies.