Sonam Wangchuk Health Update : पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर थे, फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। रविवार सुबह 8:30 बजे जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, उनके स्वास्थ्य पैरामीटर स्थिर हैं, लेकिन लंबे समय तक उपवास के कारण उनके रक्त के नमूनों में कुछ असामान्य बदलाव देखे गए हैं। सफदरजंग अस्पताल के विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। चिकित्सकीय टीम का कहना है कि उपवास के कारण उनके शरीर पर प्रणालीगत प्रभाव पड़े हैं, जिससे उन्हें निरंतर मेडिकल देखभाल की आवश्यकता है। अस्पताल प्रशासन ने आगाह किया है कि स्थिति और गंभीर होने से रोकने के लिए तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप अनिवार्य है।

इलाज से इनकार और परिवार का रुख
अस्पताल में भर्ती होने के बाद से ही स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। वांगचुक और उनके परिवार ने अस्पताल की टीम और एम्स के स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा बार-बार आग्रह किए जाने के बावजूद किसी भी प्रकार की दवा, मौखिक पुनर्जलीकरण घोल (ORS) या IV फ्लूइड लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। अस्पताल के अनुसार, वांगचुक ने अपना अनशन नहीं तोड़ा है और वे इसे अस्पताल के भीतर से ही जारी रखने पर अड़े हैं। उनकी पत्नी, गीतांजलि जे आंगमो ने अस्पताल प्रशासन को लिखित अनुरोध दिया है कि उनकी सहमति के बिना कोई भी उपचार न किया जाए। उन्होंने उपचार प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का भी आरोप लगाया है, जिससे अस्पताल और वांगचुक के समर्थकों के बीच खींचतान बढ़ गई है।

राजनीतिक घमासान और ‘चलो संसद’ का संकल्प
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन हटाए जाने के बाद विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारी समूहों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने वांगचुक के समर्थन में स्वयं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर दी है। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने के अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम पर अडिग हैं और इसे हर हाल में पूरा करेंगे।
प्रशासन और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का द्वंद्व
इस पूरे घटनाक्रम पर सत्तारूढ़ भाजपा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि प्रशासन ने पूरी तरह से सहानुभूतिपूर्वक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्य किया है। पार्टी के अनुसार, यह कार्रवाई दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों और एक जीवन को बचाने की अनिवार्यता के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से की गई थी, इसलिए इस पर आक्रोश जताना अनुचित है। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर वांगचुक के समर्थकों ने एकजुटता व्यक्त करने के लिए रात्रि जागरण किया है और सरकार पर असहमति को दबाने का आरोप लगाया है। अस्पताल के बाहर और विरोध स्थल पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, जहाँ प्रशासन की नजरें वांगचुक के स्वास्थ्य पर और प्रदर्शनकारियों की नजरें अपने आंदोलन की सफलता पर टिकी हुई हैं।
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