Sonu Nigam Auto-Tune: बॉलीवुड के मशहूर प्लेबैक सिंगर सोनू निगम अपनी शानदार और सुरीली आवाज के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने हिंदी सिनेमा के अलावा कई भाषाओं में भी यादगार गाने गाए हैं, जो लंबे समय तक लोगों की पसंद बने रहे। फिल्मों के अलावा सोनू निगम एल्बम और लाइव कॉन्सर्ट के जरिए भी दर्शकों से जुड़े रहते हैं। उनकी आवाज की खासियत और गायकी पर हमेशा चर्चा होती रही है। लेकिन हाल ही में उन्होंने अपनी सिंगिंग को लेकर ऐसा खुलासा किया है, जिसने उनके फैंस को हैरान कर दिया।

सोनू निगम ने माना, कुछ गानों में किया ऑटो-ट्यून का इस्तेमाल
सोनू निगम ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने अपने कुछ गानों में ऑटो-ट्यून तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह बात इसलिए खास है क्योंकि आमतौर पर ऑटो-ट्यून को ऐसे गायकों से जोड़कर देखा जाता है, जिन्हें सुर और पिच को सुधारने के लिए तकनीकी मदद की जरूरत होती है। सोनू जैसे अनुभवी और बेहतरीन गायकों के इस तकनीक के इस्तेमाल की बात सामने आने से उनके प्रशंसक भी चौंक गए।

डिजिटल म्यूजिक को बताया ऑटो-ट्यून की बड़ी वजह
सोनू निगम ने समझाया कि आज संगीत बनाने का तरीका पहले के मुकाबले काफी बदल चुका है। म्यूजिक इंडस्ट्री में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बड़े स्तर पर हो रहा है। उनके मुताबिक, पहले लाइव इंस्ट्रूमेंट्स के साथ रिकॉर्डिंग होती थी, इसलिए आवाज और संगीत के बीच थोड़ा अंतर स्वाभाविक रूप से संभल जाता था। लेकिन डिजिटल म्यूजिक में हर चीज ज्यादा सटीक पिच पर सेट होती है और छोटी-सी गलती भी रिकॉर्डिंग में स्पष्ट सुनाई दे सकती है।
पुराने दौर में लाइव म्यूजिक का था अलग अनुभव
सोनू ने पुराने दौर की रिकॉर्डिंग व्यवस्था का जिक्र करते हुए बताया कि पहले लाइव सारंगी, स्ट्रिंग्स और दूसरे वाद्ययंत्रों के साथ गाने रिकॉर्ड किए जाते थे। उस समय पूरा म्यूजिक लाइव तरीके से तैयार होता था। इसलिए गायक की आवाज में मामूली पिच अंतर को संगीत के साथ स्वाभाविक तरीके से संतुलित किया जा सकता था। सोनू के अनुसार, आज डिजिटल प्रोडक्शन में संगीत एक निश्चित पिच और पैटर्न पर तैयार होता है, इसलिए गायकी का सुर बिल्कुल सटीक होना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
ऑटो-ट्यून को सोनू ने गलत नहीं माना
सोनू निगम ने ऑटो-ट्यून तकनीक को पूरी तरह खराब या गलत मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक ने म्यूजिक इंडस्ट्री में कई बदलाव किए हैं। उनके मुताबिक, नई तकनीक का इस्तेमाल अपने आप में बुरा नहीं है, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसका उपयोग किस तरह किया जा रहा है। सोनू ने यह भी कहा कि वह ऐसे दौर के कलाकार हैं, जिन्होंने बिना ऑटो-ट्यून के भी लंबे समय तक अभ्यास किया है।

99 प्रतिशत आवाज को 100 प्रतिशत तक पहुंचाने की बात
सोनू निगम ने ऑटो-ट्यून के इस्तेमाल की एक सीमा भी बताई। उनके अनुसार, तकनीक का इस्तेमाल किसी ऐसे व्यक्ति को गायक बनाने के लिए नहीं होना चाहिए, जो वास्तव में गा ही नहीं सकता। उन्होंने समझाया कि कलाकार को पहले अपनी आवाज और गायकी का लगभग पूरा योगदान देना चाहिए और उसके बाद तकनीक की मदद से छोटी कमियों को सुधारा जा सकता है। यानी ऑटो-ट्यून को गायकी का विकल्प नहीं, बल्कि सुधार का साधन माना जाना चाहिए।
एक्टर्स के ऑटो-ट्यून इस्तेमाल पर भी बोले सोनू
सोनू निगम ने यह भी माना कि कई अभिनेता अपने गानों में ऑटो-ट्यून का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है कि यदि कोई अभिनेता अपने गायन के सपने को पूरा करने के लिए तकनीक की सहायता लेता है, तो इसमें कोई बड़ी समस्या नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि तकनीक के सहारे एक्टर्स को पेशेवर सिंगर्स की जगह नहीं लेनी चाहिए। उनके बयान ने म्यूजिक इंडस्ट्री में तकनीक और प्रतिभा के बीच संतुलन को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
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