@thetarget365: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य-राज्यपाल विवाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के जवाब में 14 सवाल पूछे हैं। इस घटना ने बेनजीर के संवैधानिक अधिकारों पर संघर्ष की छाया डाल दी है। स्थिति को समझने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सतर्क हो गए हैं। राज्य-राज्यपाल संघर्ष ने अब नया मोड़ ले लिया है और राष्ट्रपति तथा सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने आ गए हैं। ऐसे में स्टालिन ने देश के 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर गैर-भाजपा राज्यों से समर्थन मांगा है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ-साथ कर्नाटक, तेलंगाना, केरल और झारखंड समेत 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में स्टालिन ने आरोप लगाया कि देश की संघीय ढांचागत व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। स्टालिन ने सभी को एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ने का संदेश दिया। उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीम कोर्ट से 14 सवाल पूछे हैं। हालांकि उन्होंने इसके पीछे किसी राज्य या फैसले का जिक्र नहीं किया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि वह तमिलनाडु सरकार बनाम राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी पर सवाल उठा रहे हैं। स्टालिन ने लिखा कि मौजूदा स्थिति में सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल तमिलनाडु के लिए बल्कि सभी राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार राज्यपाल का उपयोग विपक्ष शासित राज्यों के लिए समस्याएं पैदा करने के लिए कर रही है। वे विधानसभा में पारित विधेयकों को अनुचित तरीके से रोक रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने इस कदम के खिलाफ संघीय ढांचे की रक्षा के लिए सही फैसला दिया है। इस बार भाजपा ने उस फैसले में हस्तक्षेप करने के लिए राष्ट्रपति का इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई है।
इस स्थिति में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का गैर-भाजपा राज्यों से अनुरोध, ‘मैंने पहले सभी गैर-भाजपा शासित राज्य सरकारों और क्षेत्रीय दलों के नेताओं से एकजुट होकर इस कानूनी लड़ाई को लड़ने की अपील की थी। अब मैं व्यक्तिगत रूप से सभी से इस कदम का विरोध करने की अपील करता हूं। “मैं आपसे संविधान के मूल ढांचे की रक्षा की लड़ाई में भी हाथ मिलाने का अनुरोध करता हूं।”
गौरतलब है कि यह विवाद पिछले महीने शुरू हुआ था। सर्वोच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि न तो राज्यपाल और न ही राष्ट्रपति विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर सकते हैं। उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर उस विधेयक पर निर्णय लेना होगा। समस्या यह है कि सर्वोच्च न्यायालय राज्यपाल या राष्ट्रपति को ऐसे ‘निर्देश’ आसानी से नहीं दे सकता। लेकिन संविधान के अनुच्छेद 142 के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय कानून से परे जाकर ‘न्याय स्थापित करने के उद्देश्य से’ विशेष फैसले दे सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में भी यही किया। सत्तारूढ़ खेमे के कई नेता पहले ही इसके लिए न्यायपालिका की आलोचना कर चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाल ही में खुद राष्ट्रपति ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत विशेष शक्तियां भी प्राप्त हैं। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के किसी भी निर्णय पर सवाल उठाने का अधिकार है। द्रौपदी मुर्मू ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 14 प्रश्न रखे तथा दावा किया कि यह एक अधिकार है। इन 14 प्रश्नों में उल्लेखनीय यह है कि सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रपति या राज्यपाल के लिए विधेयक पारित करने की समय सीमा कैसे निर्धारित कर सकता है? क्या राज्य केंद्र के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय की विशेष शक्तियों का उपयोग कर रहे हैं? क्या न्यायपालिका राज्यपाल के निर्णय में हस्तक्षेप कर सकती है? क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्यपाल या राष्ट्रपति की शक्ति कम नहीं हो रही है? राष्ट्रपति के कदम के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने विपक्षी खेमे से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की है।
Cancer Prevention 2026: हाल के वर्षों में भारत सहित पूरी दुनिया में कैंसर के मामलों…
Akshaya Tritiya 2026: भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का पर्व केवल एक…
ISRO Space Debris News: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की हालिया ‘इंडियन स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस…
Gold Silver Price 2026: भारतीय सर्राफा बाजार में आज यानी 17 अप्रैल 2026 की सुबह…
Patna High Court Recruitment 2026: बिहार में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और…
UN Warning: मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच…
This website uses cookies.