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Stock Market Crash: दलाल स्ट्रीट पर ‘ब्लैक फ्राइडे’, आईटी शेयरों ने डुबोए निवेशकों के अरबों रुपये, जानें क्यों

Stock Market Crash: सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थितियाँ बेहद चुनौतीपूर्ण रहीं। शुक्रवार की सुबह दलाल स्ट्रीट पर ‘ब्लैक फ्राइडे’ जैसा नजारा देखने को मिला, जहाँ निवेशकों के सेंटिमेंट पर वैश्विक दबाव और घरेलू बिकवाली का गहरा असर पड़ा। गुरुवार को आईटी सेक्टर में आई गिरावट का सिलसिला आज भी जारी रहा, जिसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने भारी गोता लगाया। बाजार खुलते ही निवेशकों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया और बिकवाली के दबाव ने इंडेक्स को लाल निशान के काफी नीचे धकेल दिया।

सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती बड़ी गिरावट

कारोबार की शुरुआत होते ही 30 शेयरों वाला बीएसई (BSE) सेंसेक्स करीब 772 अंकों की भारी गिरावट के साथ खुला। वहीं, एनएसई (NSE) निफ्टी भी इस दबाव से अछूता नहीं रहा और 236 अंकों की कमजोरी दर्ज करते हुए 25,571 के स्तर पर कामकाज शुरू किया। बेंचमार्क इंडेक्स में आई इस गिरावट ने बाजार की दिशा को पूरी तरह नकारात्मक कर दिया। जानकारों का मानना है कि तकनीकी स्तर पर महत्वपूर्ण सपोर्ट टूटने की वजह से बिकवाली और तेज हो गई है।

आईटी सेक्टर में कोहराम और दिग्गज शेयरों का हाल

आज की गिरावट का सबसे बड़ा केंद्र ‘निफ्टी आईटी इंडेक्स’ रहा, जिसमें 5 प्रतिशत से भी अधिक की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गजों में शामिल Infosys को सबसे तगड़ा झटका लगा, जिसके शेयर 5.6 प्रतिशत तक टूट गए। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), एचसीएल टेक (HCL Tech), एलटीआई माइंडट्री (LTIMindtree), कोफोर्ज और विप्रो जैसे बड़े स्टॉक्स भी भारी बिकवाली की चपेट में रहे। आईटी कंपनियों के निराशाजनक वैश्विक आउटलुक ने ओवरऑल मार्केट सेंटिमेंट को कमजोर कर दिया है।

ब्रॉडर मार्केट और मिडकैप-स्मॉलकैप की स्थिति

बाजार की गिरावट केवल दिग्गज शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ब्रॉडर मार्केट में भी जबरदस्त दबाव देखा गया। मझोली और छोटी कंपनियों के सूचकांकों में भी निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। इस दौरान निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.3 प्रतिशत तक फिसल गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आई इस गिरावट से खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो पर गहरा असर पड़ा है।

एशियाई और वैश्विक बाजारों के सुस्त संकेत

भारतीय बाजारों में आई इस गिरावट के पीछे कमजोर वैश्विक संकेत एक प्रमुख कारण रहे। अमेरिकी शेयर बाजार ‘वॉल स्ट्रीट’ में रातोंरात हुई गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। जापान का निक्केई 225 सूचकांक, जो कुछ समय पहले 58,000 के स्तर पर था, 0.58 प्रतिशत तक नीचे आ गया। इसी तरह दक्षिण कोरिया का कोस्डैक 1.36 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स भी अपने पिछले बंद भाव से काफी नीचे कारोबार करता नजर आया। केवल दक्षिण कोरियाई कोस्पी में मामूली बढ़त देखी गई।

निवेशकों के लिए आगे की राह

बाजार के जानकारों का मानना है कि फिलहाल आईटी शेयरों में अस्थिरता बनी रह सकती है। जब तक वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत नहीं मिलते और विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) अपनी बिकवाली पर लगाम नहीं लगाते, तब तक भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई बड़ा निवेश न करें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें।

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