NHM workers protest: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारी 18 अगस्त से हड़ताल पर हैं। 15 दिन से अधिक समय बीतने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं और मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने अलग-अलग तरीकों से सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की है – कोई खून से पत्र लिख रहा है, तो कोई काली पट्टी पहनकर धरना दे रहा है।

सरकार का आदेश और कर्मचारियों का विरोध
सोमवार को छत्तीसगढ़ सरकार ने हड़ताली NHM कर्मियों को 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने का आदेश जारी किया था। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर कर्मचारी आदेश नहीं मानते हैं तो उन्हें बर्खास्त किया जा सकता है।
मंगलवार को जब यह समयसीमा समाप्त हुई, तो NHM संविदा कर्मचारी रायपुर स्थित स्वास्थ्य संचालनालय पहुंचे और विरोध स्वरूप सरकारी आदेश की प्रति जला दी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार के किसी दबाव में नहीं झुकेंगे और जब तक उनकी सभी मांगें नहीं मानी जातीं, हड़ताल जारी रहेगी।
किन मांगों पर अड़े हैं कर्मचारी?
हालांकि राज्य सरकार ने 10 में से 5 मांगों को स्वीकार कर लिया है, लेकिन कर्मचारी बाकी पांच प्रमुख मांगों पर भी अमल की मांग कर रहे हैं। प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
स्थायी नियुक्ति और नियमितीकरण
समान कार्य के लिए समान वेतन
सेवा सुरक्षा और बीमा सुविधाएं
प्रमोशन की स्पष्ट नीति
अनुबंध अवधि बढ़ाने और स्थायी करने की गारंटी
स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज परेशान
NHM कर्मियों की हड़ताल का सीधा असर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उप स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों पर देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, और रोग नियंत्रण कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
मरीजों और उनके परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर वैकल्पिक स्टाफ लगाया गया है, लेकिन वो अपर्याप्त साबित हो रहा है।
क्या कहती है सरकार?
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना जनहित के खिलाफ है। आदेशों की अवहेलना करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।










