Summer Gardening Tips : जून के इस महीने में जब सूरज देवता आसमान से आग बरसा रहे हैं, तो सिर्फ हम इंसान ही नहीं बल्कि हमारे घरों में लगे प्यारे हरे-भरे पौधे भी बुरी तरह बेहाल हो जाते हैं। इस मौसम में चलने वाली तेज धूप और गर्म थपेड़ों यानी हीटवेव के कारण अक्सर गमलों में लगे पौधों की पत्तियां ऊपर से झुलसने लगती हैं, पीली पड़ जाती हैं और आखिरकार सूखकर गिरने लगती हैं। ऐसे नाजुक समय में बहुत से लोग अनजाने में एक बहुत बड़ी गलती कर बैठते हैं। वे पौधों की यह हालत देखकर तुरंत कैंची या कटर उठा लेते हैं और पौधों की प्रूनिंग यानी छंटाई करना शुरू कर देते हैं। उन्हें लगता है कि सूखी पत्तियों को हटाने से पौधा फिर से ठीक और सुंदर हो जाएगा, लेकिन इस कड़कड़ाती गर्मी में ऐसा करना पौधे की जान भी ले सकता है।

प्रूनिंग की गलती पौधों को पहुंचा सकती है भारी नुकसान
अगर आपका होम गार्डन भी इस भीषण हीटवेव की चपेट में आकर बेजान और सूखा नजर आ रहा है, तो आपको पैनिक होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बस आपको कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना होगा। जब पौधे अत्यधिक गर्मी और तेज धूप की वजह से स्ट्रेस (तनाव) में होते हैं, तो उनकी ऊपरी सूखी और झुलसी हुई पत्तियां असल में एक विशेष सुरक्षा कवच का काम करती हैं। ये सूखी पत्तियां नीचे मौजूद हरी और नाजुक पत्तियों के साथ-साथ तने को सीधी धूप से बचाती हैं। ये पत्तियां कड़कड़ाती धूप को सीधे तने और जड़ों की गहराई तक पहुंचने से रोकती हैं। अगर आप इस समय पौधे की छंटाई कर देंगे, तो उसके अंदर बचा-खुचा मॉइस्चर (नमी) भी तुरंत उड़ जाएगा और पौधा गहरे शॉक में चला जाएगा, जिससे उसे बचाना मुश्किल हो जाएगा।

छंटाई करने से पौधे के विकास पर पड़ता है बुरा असर
गर्मियों के मौसम में छंटाई करने से पौधे को नई ग्रोथ यानी नई पत्तियां और शाखाएं निकालने के लिए एक्स्ट्रा एनर्जी लगानी पड़ती है। इस भीषण गर्मी में पौधे के पास इतनी ऊर्जा, पर्याप्त न्यूट्रिशन और पानी नहीं होता कि वह नई ग्रोथ को संभाल सके। इसलिए बागवानी एक्सपर्ट्स की मानें तो जब तक मौसम थोड़ा ठंडा न हो जाए और मानसून की बारिश की शुरुआत न हो जाए, तब तक प्रूनिंग टूल्स को हाथ भी न लगाएं। सूखी और पीली पड़ चुकी पत्तियों को अभी उनके हाल पर ही छोड़ देना पौधे के स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर और सुरक्षित विकल्प होता है।
मल्चिंग और ग्रुपिंग: झुलसते पौधों को बचाने का हिट फॉर्मूला
झुलसते और सूखते हुए पौधों को बचाने का सबसे पहला और सबसे हिट फॉर्मूला है मल्चिंग, यानी गमले की ऊपरी मिट्टी को अच्छी तरह ढकना। इसके लिए आप सूखे पत्तों, धान के भूसे, लकड़ी के छिलकों या फिर कोकोपीट की एक मोटी लेयर मिट्टी के ऊपर बिछा दें। ऐसा करने से गमले का पानी तेज धूप में तुरंत भाप बनकर नहीं उड़ेगा और पौधों की जड़ों में लंबे समय तक जरूरी नमी बनी रहेगी। इसके अलावा, अपने सारे गमलों को अलग-अलग दूरी पर रखने के बजाय एक साथ सटाकर समूह (ग्रुप) में रखें। जब पौधे साथ होते हैं, तो वे आपस में एक-दूसरे को नमी प्रदान करते हैं, जिससे उनके आसपास का तापमान कम रहता है और गर्म हवाओं का असर काफी हद तक घट जाता है।
गर्मियों में वाटरिंग और शेडिंग का रखें विशेष ध्यान
इस मौसम में पौधों को पानी देने का नियम बदलना बेहद जरूरी है। पौधों को पानी हमेशा सुबह के वक्त सूरज निकलने से पहले या फिर शाम को सूरज ढलने के बाद ही दें। दोपहर के समय जब मिट्टी बेहद गर्म होती है, तब पानी देने की गलती कभी न करें, क्योंकि इससे जड़ें उबल सकती हैं। अगर मुमकिन हो, तो अपने पूरे गार्डन या बालकनी के ऊपर एक ग्रीन नेट (हरी जाली) लगा दें। इससे पौधों को छनकर हल्की धूप मिलेगी, जिससे आपके पौधे इस चिलचिलाती गर्मी और जानलेवा लू में भी एकदम सुरक्षित, फ्रेश, कूल और मुस्कुराते रहेंगे।

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