Manipur Violence Case : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 19 अगस्त 2025 को मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से जुड़े जातीय हिंसा मामले में चल रही ऑडियो क्लिप जांच को लेकर केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने इस जांच को पूरी तरह गलत दिशा में बताया और CFSL पर अदालत के आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाया। साथ ही, कोर्ट ने बीरेन सिंह की बेटी द्वारा पक्षकार बनने की याचिका को भी खारिज कर दिया।

CFSL की जांच पर सुप्रीम कोर्ट का फटकार
इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच — जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा — ने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल ऑडियो रिकॉर्डिंग्स की आवाज की प्रामाणिकता जांचने का निर्देश दिया था, न कि वीडियो की। कोर्ट ने कहा, “हमने वीडियो की प्रामाणिकता के बारे में नहीं पूछा था, बल्कि यह जानना चाहते थे कि क्या ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज़ वही व्यक्ति बोल रहा है, जिसके स्वीकृत आवाज़ के नमूने हमें उपलब्ध कराए गए हैं।”

केंद्र की जांच एजेंसी CFSL ने इस आदेश को गलत समझा और वीडियो की प्रामाणिकता पर जांच करने का प्रयास किया, जो कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, “पूरी जांच गलत दिशा में की गई है और हमें सिर्फ आधे- अधूरे जवाब मिले हैं। CFSL को भ्रम है कि हमें वीडियो की असली होने की पुष्टि करनी है।”
बीरेन सिंह की बेटी की याचिका खारिज, कोर्ट का तीखा रुख
सुप्रीम कोर्ट ने बीरेन सिंह की बेटी की याचिका को भी ठुकरा दिया, जिसमें वे पक्षकार बनना चाहती थीं। कोर्ट ने कहा, “यह कोई पारिवारिक सहायता कार्यक्रम नहीं है,” और मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए साफ किया कि न्यायिक प्रक्रिया में पारिवारिक भावनाओं को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ता ने SIT जांच की मांग की
मामले की सुनवाई के दौरान कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट के वकील प्रशांत भूषण ने इस मामले की स्वतंत्र SIT जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि CFSL पर मणिपुर सरकार का प्रशासनिक नियंत्रण है, जिससे जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक नियंत्रण के आधार पर हर संगठन की प्रामाणिकता पर संदेह नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अगर आवश्यक हुआ तो विदेशी फॉरेंसिक एजेंसी को जांच के लिए बुलाया जा सकता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के दूसरी अदालत में व्यस्त रहने के कारण मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त तक स्थगित कर दी गई है।
मणिपुर में जातीय हिंसा और ऑडियो क्लिप का मामला
इस विवादित मामले में कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मई 2023 में राज्य में फैली जातीय हिंसा को उकसाया और हिंसा में शामिल लोगों को संरक्षण दिया। याचिका में लीक हुए ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने कुकी बहुल इलाकों में हिंसा भड़काने की अनुमति दी और हिंसा में शामिल लोगों को बचाने के निर्देश दिए। इन आरोपों के बाद 9 फरवरी 2025 को बीरेन सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
मामले की संवेदनशीलता और जांच की जरूरत
मणिपुर की जातीय हिंसा और पूर्व मुख्यमंत्री की कथित भूमिका के मामले ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। ऑडियो क्लिप की जांच का विवाद इस बात को रेखांकित करता है कि जांच एजेंसियों की निष्पक्षता और स्वतंत्रता कितनी महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार से यह स्पष्ट हुआ है कि जांच के हर पहलू का सही दिशा में और पारदर्शी तरीके से संचालन होना चाहिए।
SIT जांच की मांग
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की कथित भूमिका वाले ऑडियो क्लिप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की जांच प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल आवाज़ की प्रामाणिकता जांचनी है न कि वीडियो की। मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र SIT जांच की मांग की गई है, लेकिन कोर्ट ने विदेशी एजेंसी की मदद लेने के विकल्प भी खुला रखा है।
इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी, जब इस पर और विस्तार से विचार किया जाएगा। देश की न्यायपालिका इस मामले में निष्पक्षता और सही न्याय दिलाने के लिए सख्त कदम उठा रही है, ताकि मणिपुर की हिंसा के पीछे की सच्चाई सार्वजनिक हो सके।










