SC Jantar Mantar Protest : सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में एफआईआर रद्द करने के अपने पहले के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि प्रदर्शन के संबंध में दर्ज एफआईआर की जांच निष्पक्ष तरीके से सुनिश्चित करने के लिए उचित निर्देश जारी किए जाएं। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस मांग पर सुनवाई आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य और उनके जीवन पर मुकदमों के संभावित प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
‘हम नहीं चाहते कि युवा मुकदमों में उलझें’
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के सामने ऐसे युवा छात्र आए थे, जिनके भविष्य और पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी था। उन्होंने कहा कि अदालत नहीं चाहती कि युवा लंबे समय तक मुकदमों में उलझे रहें और उन्हें बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने पड़ें। सीजेआई की टिप्पणी का मुख्य आधार यह था कि न्यायिक फैसले लेते समय संबंधित व्यक्तियों के पूरे जीवन और भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को भी समझना आवश्यक है।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दिया यह तर्क
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि इस मामले में एक स्पष्ट संदेश जाना जरूरी है। उनका कहना था कि कुछ लोग अदालतों में इस तरह पहुंचते हैं, जैसे न्यायालय उनकी निजी संपत्ति हों। याचिकाकर्ता ने एफआईआर रद्द करने के पहले के फैसले पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच के लिए निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों के आधार पर मामले में आगे सुनवाई करने की आवश्यकता नहीं मानी।
दूसरे मामलों का भी किया उल्लेख
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के अन्य मामलों में दिए गए आदेशों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने ऐसे मामलों का उल्लेख किया, जिनमें सांसदों और विधायकों के धरना-प्रदर्शन तथा कोविड-19 महामारी के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित मुकदमों पर विचार किया गया था। सीजेआई के अनुसार, कुछ मामलों में मुकदमे इसलिए रद्द किए गए थे क्योंकि संबंधित व्यक्तियों को आदतन अपराधी नहीं माना गया था। अदालत ने इन उदाहरणों के माध्यम से अपने पूर्व फैसलों के संदर्भ को समझाया।
याचिका को बताया मूल रूप से रिव्यू याचिका जैसा
मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिका मूल रूप से समीक्षा याचिका जैसी प्रतीत होती है। इसके जरिए अदालत के पहले के निर्णय को गलत ठहराने की कोशिश की जा रही थी। मामला जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए सीजेपी प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले से जुड़ा था। याचिकाकर्ता चाहता था कि इस फैसले पर दोबारा विचार हो और जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए जाएं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने अंततः याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम में अदालत की टिप्पणियों ने युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य, मुकदमों के प्रभाव और पूर्व न्यायिक फैसलों की भूमिका को प्रमुखता दी। हालांकि, इस आदेश को सभी प्रदर्शन मामलों में लागू होने वाला सामान्य नियम नहीं माना जाना चाहिए। प्रत्येक मामले में परिस्थितियों, आरोपों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर न्यायिक निर्णय लिया जाता है। जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े इस मामले में याचिकाकर्ता को फिलहाल मांगी गई राहत नहीं मिली।
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