Taiwan president on Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि अगर ट्रंप चीन को ताइवान पर सैन्य आक्रमण से हमेशा के लिए रोकने में सफल हो जाते हैं, तो उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार जरूर मिलना चाहिए।

अमेरिकी पॉडकास्ट में रखी राय
राष्ट्रपति लाई ने एक अमेरिकी रेडियो शो और पॉडकास्ट ‘द क्ले ट्रैविस एंड बक सेक्सटन शो’ में कहा कि ताइवान अमेरिका को अपना सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय सहयोगी मानता है, भले ही औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप के कार्यकाल में कोई नया हथियार सौदा घोषित नहीं किया गया, लेकिन उनका चीन के खिलाफ रुख स्पष्ट रहा है।

ट्रंप-शी जिनपिंग संभावित मुलाकात पर भी बोले लाई
लाई का यह बयान तब आया है जब मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप इस महीने के अंत में दक्षिण कोरिया में एशिया-प्रशांत नेताओं की बैठक में शामिल हो सकते हैं, जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की संभावना है। लाई ने कहा “अगर ट्रंप, शी जिनपिंग को ताइवान पर सैन्य कार्रवाई से स्थायी रूप से रोकने में सफल हो जाते हैं, तो वे निश्चित रूप से नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार होंगे।”
ट्रंप पहले भी कर चुके हैं नोबेल की मांग
डोनाल्ड ट्रंप खुद भी कई मौकों पर दावा कर चुके हैं कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। उन्होंने इजरायल-अरब देशों के बीच अब्राहम समझौता कराने और उत्तर कोरिया से बातचीत को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया था।
चीन की धमकी और ताइवान की चिंता
राष्ट्रपति लाई ने स्पष्ट किया कि चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां सिर्फ ताइवान के लिए नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक गंभीर चुनौती हैं। उनका कहना था कि अगर चीन ने ताइवान पर कब्जा कर लिया, तो वह वैश्विक शक्ति संतुलन को हिला सकता है और अमेरिका के लिए सीधी चुनौती बन जाएगा।
अमेरिका की अस्पष्ट नीति पर सवाल
ताइवान को लेकर अमेरिकी नीति अभी भी अस्पष्ट है। अमेरिकी कानून के तहत अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा के लिए हथियार देने के लिए बाध्य है, लेकिन अगर चीन ने हमला किया तो अमेरिका सैन्य रूप से हस्तक्षेप करेगा या नहीं, इस पर कोई स्पष्ट नीति नहीं है।
चीन लगातार लाई चिंग-ते को “अलगाववादी” करार देता रहा है और उनकी बातचीत की पेशकशों को नजरअंदाज करता आया है। राष्ट्रपति लाई चिंग-ते का बयान न सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को फिर से चर्चा में ला रहा है, बल्कि ताइवान और चीन के बीच बढ़ते तनाव पर वैश्विक ध्यान भी केंद्रित कर रहा है। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा इस हफ्ते शुक्रवार को नॉर्वे में की जाएगी, और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप इसमें कोई भूमिका निभा सकते हैं।











