Kolkata Accident : कोलकाता के तारातला ट्रांसपोर्ट डिपो के निकट एक हृदयविदारक घटना में बुधवार, 24 मई को एक निर्माणाधीन वेयरहाउस की छत ढह गई, जिससे पूरे इलाके में मातम पसर गया है। तीन मंजिला इस गोदाम का निर्माण कार्य जोरों पर था, तभी अचानक छत का ढांचा भरभरा कर नीचे आ गिरा। इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मलबे में दबने से अब तक 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। बचाव और राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन मलबे के विशाल ढेर को देखते हुए अभी भी कई जिंदगियों पर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

प्रत्यक्षदर्शी ने बयां की हादसे की भयावह दास्तां
घटनास्थल के पास दुकान चलाने वाले स्थानीय निवासी सुरिंदर साउ, जो इस हादसे के सबसे पहले गवाह बने, ने मंजर को बयां करते हुए बताया कि दोपहर के समय उन्हें एक जोरदार धमाका सुनाई दिया। बाहर आकर देखने पर उन्होंने पाया कि निर्माणाधीन गोदाम का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो चुका था। उन्होंने तुरंत स्थानीय लोगों को साथ लेकर पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचित किया। सुरिंदर के अनुसार, जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय गोदाम के भीतर 50 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे। उन्होंने आशंका जताई है कि अभी भी करीब 20 से 22 लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की चिंता बनी हुई है।

मुआवजे का ऐलान और मुख्यमंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया
इस गंभीर आपदा को देखते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सदन में घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये और इस दुर्घटना में घायल हुए लोगों के इलाज के लिए 1-1 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि राहत कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है और प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। सरकार इस पूरी घटना की गंभीरता को समझ रही है और हर स्तर पर मदद का आश्वासन दिया गया है।
घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का गंभीर आरोप
इस हादसे के बाद से ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सूत्रों और जानकारों का आरोप है कि गोदाम के निर्माण में मानकों की अनदेखी करते हुए बेहद घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, छत की कास्टिंग के दौरान स्ट्रक्चर का भार न झेल पाना स्पष्ट रूप से लापरवाही की ओर इशारा करता है। इस लापरवाही के कारण ही मजदूरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। फिलहाल प्रशासन ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस निर्माण कार्य के पीछे किसकी लापरवाही थी और क्या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया गया था। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है।
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