Teacher vacancies in India : देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए संसद की स्थायी समिति ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। शिक्षा, महिला, बाल, खेल एवं युवा कल्याण संबंधी संसदीय समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में खुलासा किया है कि देश भर में लगभग 10 लाख शिक्षकों के पद खाली हैं। यह संकट केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों और राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में व्याप्त है।

समिति ने क्यों लगाई फटकार?
समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अस्थायी शिक्षकों की भर्ती पर रोक लगाई जाए और इसके स्थान पर स्थायी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था से शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है।

सांसद विकास भट्टाचार्य ने कहा, “केंद्र सरकार शिक्षा को ऐसा बना रही है कि वह गरीब और वंचित वर्गों की पहुंच से बाहर हो जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) अमीरों के लिए शिक्षा का रास्ता आसान करेगी और गरीबों को और पीछे धकेल देगी।”
एनईपी को लेकर समिति की आपत्तियां
रिपोर्ट में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लेकर भी कड़ी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। समिति का मानना है कि यह नीति अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग और गरीब छात्रों के लिए हानिकारक हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि एनईपी को कई श्रेणियों में बांट दिया गया है, लेकिन छात्रों को इसका कोई ठोस लाभ नहीं मिल रहा।
एनसीईआरटी और बी.एड प्रोग्राम पर टिप्पणी
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनसीईआरटी ने वर्ष 1999 से अब तक शिक्षकों की नियमित भर्ती नहीं की है, जिसके कारण एक बड़ा शिक्षण शून्य पैदा हो गया है। इसके अलावा, बी.एड स्नातक कार्यक्रम, जो पिछले तीन दशकों से प्राथमिक स्तर के शिक्षक तैयार कर रहा था, उसे भी नीति के तहत नजरअंदाज किया जा रहा है। समिति ने इसके पीछे सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का हमला
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रिपोर्ट के आधार पर सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार को घेरते हुए लिखा, “मोदी सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था के साथ छल कर रही है। शिक्षकों की कमी और भर्ती में देरी से छात्रों का भविष्य अंधकार में है।” देश में शिक्षकों की भारी कमी, स्थायी भर्तियों पर रोक, और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की खामियों को लेकर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि शीघ्र स्थायी शिक्षक भर्तियां नहीं की गईं और नीति में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर देश के करोड़ों छात्रों और भविष्य की पीढ़ियों पर पड़ेगा।
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