तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम में देर रात अचानक आई एक ऐसी आपदा जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। जब पूरी दुनिया गहरी नींद में सो रही थी, तब धरती के भीतर मची एक बड़ी हलचल ने तबाही का खौफ पैदा कर दिया। जानिए आखिर उस खौफनाक रात में क्या हुआ था?
तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम में देर रात अचानक आई एक ऐसी आपदा जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। जब पूरी दुनिया गहरी नींद में सो रही थी, तब धरती के भीतर मची एक बड़ी हलचल ने तबाही का खौफ पैदा कर दिया। जानिए आखिर उस खौफनाक रात में क्या हुआ था?

Telangana Earthquake : तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को अचानक धरती हिलने से हड़कंप मच गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) से मिली जानकारी के मुताबिक, यह भूकंप रात के करीब दो बजकर 26 मिनट पर दर्ज किया गया। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.8 मापी गई है। राहत की बात यह रही कि इस कम तीव्रता वाले भूकंप के कारण क्षेत्र में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या बड़ी तबाही की कोई खबर सामने नहीं आई है। रात का समय होने के कारण जिले के अधिकांश नागरिक गहरी नींद में सो रहे थे, जिसके चलते बड़ी आबादी को इन झटकों का अहसास तक नहीं हुआ।


मौसम और भूगर्भीय वैज्ञानिकों के अनुसार, इस भूकंप का हाइपोसेंटर यानी केंद्र जमीन के भीतर काफी उथला था। रिक्टर स्केल पर 3.8 तीव्रता के इस झटके का केंद्र सतह से मात्र 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। यद्यपि कुछ स्थानीय लोगों ने रात के सन्नाटे में हल्के कंपनों को जरूर महसूस किया, लेकिन इसकी तीव्रता इतनी कम थी कि यह किसी भी प्रकार की बड़ी संरचनात्मक क्षति पहुंचाने में पूरी तरह असमर्थ रहा। आपदा प्रबंधन विभाग ने भी पुष्टि की है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में है।

भूकंप की वास्तविक ताकत को रिक्टर स्केल या आधुनिक ‘मॉमेंट मैग्नीट्यूड स्केल’ के जरिए मापा जाता है। यह एक लॉगरिदमिक पैमाना है, जिसका सीधा मतलब यह है कि स्केल पर हर 1 पॉइंट की बढ़ोतरी होने से कंपन की शक्ति में 10 गुना और उससे निकलने वाली ऊर्जा में लगभग 31 से 32 गुना तक का भारी इजाफा हो जाता है। भूविज्ञान के नियमों के अनुसार, विभिन्न तीव्रताओं के प्रभाव को इस तरह समझा जा सकता है:
3.0 से कम: बेहद कमजोर झटका, जिसे सामान्य तौर पर लोग महसूस नहीं कर पाते हैं।
3.0 से 3.9: हल्का झटका (जैसा तेलंगाना में आया) — अक्सर महसूस होता है, पर नुकसान न के बराबर होता है।
4.0 से 4.9: हल्के से मध्यम स्तर का झटका — इसके प्रभाव से पुरानी या कमजोर इमारतों में मामूली दरारें आ सकती हैं।
5.0 से 5.9: मध्यम श्रेणी का भूकंप — मजबूत इमारतों को हल्की ठेस पहुंचती है, जबकि कमजोर ढांचे ढह सकते हैं।
6.0 से 6.9: शक्तिशाली भूकंप — यह सैकड़ों किलोमीटर के बड़े रिहायशी इलाकों में भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
7.0 से 7.9: अत्यंत विनाशकारी भूकंप — बड़े पैमाने पर गंभीर तबाही और हजारों मौतों की वजह बनता है।
8.0 या उससे अधिक: महाविनाशकारी स्तर — पूरी सभ्यता तबाह करने की क्षमता, भारी सुनामी का खतरा।
हमारी पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत (क्रस्ट) मुख्य रूप से कई बड़ी और छोटी टेक्टॉनिक प्लेट्स में विभाजित है। ये विशालकाय प्लेटें भूगर्भ के भीतर बहने वाले मैग्मा के ऊपर हर साल कुछ सेंटीमीटर की बेहद धीमी रफ्तार से लगातार खिसकती रहती हैं। इस निरंतर गति के दौरान जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे से रगड़ खाती हैं या फिर विपरीत दिशा में अलग होती हैं, तो इनके किनारों पर भारी मात्रा में भूगर्भीय तनाव और दबाव जमा होने लगता है। जब यह संचित तनाव अपनी चरम सीमा को पार कर जाता है, तो चट्टानें अचानक टूट जाती हैं या प्लेट्स तेजी से खिसकती हैं।
इस आकस्मिक हलचल से जो प्रचंड ऊर्जा तरंगे (Seismic Waves) निकलती हैं, वही सतह पर भूकंप के रूप में महसूस होती हैं। हमारा भारत देश मुख्य रूप से ‘इंडियन प्लेट’ पर स्थित है, जो निरंतर उत्तर की ओर ‘यूरेशियन प्लेट’ को धक्का दे रही है। इसी आपसी टकराव और दबाव के कारण ही विशाल हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हो रहा है। तेलंगाना का भौगोलिक क्षेत्र दक्षिण के पठार पर स्थित होने के कारण भूकंप के लिहाज से अपेक्षाकृत काफी सुरक्षित माना जाता है, लेकिन टेक्टॉनिक एडजस्टमेंट की वजह से कभी-कभी यहां ऐसे छोटे और हल्के झटके देखने को मिल जाते हैं।

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