Telangana politics 2025: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी इन दिनों 650 करोड़ रुपये की लागत से बनी नई सचिवालय इमारत में नहीं बैठ रहे हैं। राज्य सरकार के कामकाज का संचालन वे बंजारा हिल्स स्थित हाई सिक्योरिटी वाले तेलंगाना पुलिस कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से कर रहे हैं। इसके पीछे वजह है नई सचिवालय बिल्डिंग में मौजूद वास्तु दोष और सूचना लीक की आशंका।

रेवंत रेड्डी के करीबी अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री को सचिवालय में बैठते समय बार-बार बेचैनी और नकारात्मक ऊर्जा का अहसास हो रहा था। वास्तु विशेषज्ञों से जांच कराई गई तो इमारत में कई वास्तु दोष पाए गए। इसके बाद उन्होंने वहीं बैठने से परहेज किया और कंट्रोल सेंटर से कामकाज संभालना शुरू कर दिया।

केसीआर के समय बनी थी नई इमारत
इस सात मंजिला अत्याधुनिक सचिवालय भवन का निर्माण पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के कार्यकाल में हुआ था। 30 अप्रैल 2023 को इसका उद्घाटन खुद केसीआर ने किया था। उन्होंने पुराने सचिवालय को वास्तु दोषपूर्ण बताते हुए करीब 70 करोड़ खर्च कर तुड़वाया था। केसीआर ने नए भवन की डिजाइन इस तरह करवाई थी कि उनके बेटे के. टी. रामाराव को भविष्य में राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर बैठाया जा सके।
बदली गई एंट्री गेट की दिशा
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इमारत का मेन एंट्रेंस पहले पूर्व दिशा की ओर था, जिसे बाद में दक्षिण-पूर्व में स्थानांतरित कर दिया गया। वास्तु के जानकारों का मानना है कि यह परिवर्तन भवन में नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है।
लीक हो रही थीं गोपनीय बैठकें
रेवंत रेड्डी के करीबी अधिकारियों ने बताया कि सचिवालय में आज भी कई केसीआर समर्थक अधिकारी मौजूद हैं। शुरुआत में जब रेवंत ने वहां बैठना शुरू किया, तो कैबिनेट की गोपनीय बैठकें लीक होने लगीं। इससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। वर्ष की शुरुआत में सामने आए फोन टैपिंग मामले ने मुख्यमंत्री के संदेह को और गहरा कर दिया।
कंट्रोल सेंटर बना नया पॉवर हब
इन सभी कारणों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सचिवालय की जगह पुलिस कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को अपना कार्यस्थल बना लिया। अब वे वही से सभी महत्वपूर्ण बैठकों और निर्णयों का संचालन कर रहे हैं। केवल विशेष मामलों में ही वे सचिवालय जाते हैं, जब किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल या विशिष्ट व्यक्ति से मुलाकात होनी हो।
विपक्ष ने बताया फिजूलखर्ची
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पहले ही सचिवालय निर्माण को बेवजह का खर्चा बता चुके हैं। उस वक्त राज्य आर्थिक संकट से जूझ रहा था और कोविड महामारी का दौर चल रहा था। इसके बावजूद केसीआर ने राष्ट्रीय राजनीति में पैर जमाने के उद्देश्य से यह निर्माण कार्य करवाया।
अब जब उसी इमारत में वास्तु दोष और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते नया मुख्यमंत्री बैठने से बच रहा है, तो यह मुद्दा फिर से गरमाता नजर आ रहा है।










