TMC Attack on BJP
TMC Attack on BJP : पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को ‘आरोपपत्र युद्ध’ छिड़ गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ 14 सूत्रीय चार्जशीट जारी करने के कुछ ही घंटों के भीतर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी जवाबी हमला करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ अपना आरोपपत्र जारी कर दिया। टीएमसी ने न केवल भाजपा शासित राज्यों में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों को बंगाल विरोधी और विभाजनकारी करार दिया।
टीएमसी की फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा ने अमित शाह के आरोपों का जवाब देते हुए मणिपुर की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अमित शाह को बंगाल पर उंगली उठाने से पहले मणिपुर की सुलगती स्थिति पर जवाब देना चाहिए। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि पूर्वोत्तर का यह राज्य पिछले तीन वर्षों से जातीय हिंसा की आग में जल रहा है और वहां लगातार खून बह रहा है, लेकिन केंद्र सरकार वहां शांति बहाल करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने सवाल किया कि जो सरकार एक छोटे राज्य को सुरक्षा नहीं दे सकती, वह बंगाल की कानून-व्यवस्था पर बोलने का नैतिक अधिकार कैसे रखती है?
तृणमूल कांग्रेस ने अपने आरोपपत्र में भाजपा शासित विभिन्न राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के आंकड़ों को पेश किया। टीएमसी नेताओं ने तर्क दिया कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए बंगाल को निशाना बना रही है, जबकि हकीकत यह है कि भाजपा शासित राज्यों में महिलाएं कहीं अधिक असुरक्षित हैं। पार्टी ने कहा कि ‘बेटी बचाओ’ का नारा देने वाली पार्टी के राज में हाथरस और उन्नाव जैसी घटनाएं उनके कुशासन का असली चेहरा उजागर करती हैं।
टीएमसी ने भाजपा की चुनावी रणनीति पर हमला करते हुए कहा कि भगवा पार्टी बंगाल में अपना “नफरत भरा असम-शैली का नजरबंदी शिविर (Detention Centre) मॉडल” थोपना चाहती है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर ‘बंगाली’ और ‘बांग्लादेशी’ के बीच के अंतर को धुंधला करने की कोशिश कर रही है। टीएमसी के अनुसार, एनआरसी और सीएए के नाम पर भाजपा वास्तविक बंगाली नागरिकों को डराने और उन्हें अपनी ही जमीन पर बेगाना बनाने की साजिश रच रही है।
रैली और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से टीएमसी ने जनता को संदेश दिया कि भाजपा की राजनीति केवल धर्म और पहचान के आधार पर समाज को बांटने तक सीमित है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास विकास का कोई वास्तविक एजेंडा नहीं है, इसलिए वे ‘सिंडिकेट राज’ और ‘भ्रष्टाचार’ जैसे पुराने आरोपों को दोहरा रहे हैं। ममता बनर्जी की पार्टी ने दावा किया कि बंगाल की जनता भाजपा की इस “असम-मॉडल” वाली राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेगी और आगामी चुनाव में उन्हें करारा जवाब देगी।
टीएमसी के इस जवाबी आरोपपत्र ने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 विकास के मुद्दों से कहीं अधिक राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय अस्मिता और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द सिमटने वाला है। जहां भाजपा ‘परिवर्तन’ का नारा दे रही है, वहीं टीएमसी ‘बंगाल की बेटी’ और ‘बंगाली गौरव’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। अमित शाह और महुआ मोइत्रा के बयानों ने चुनावी सरगर्मी को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, जिससे आने वाले दिन और भी अधिक राजनीतिक घमासान वाले होने की उम्मीद है।
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