TMC Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की, जिसके बाद राज्य से लेकर केंद्र तक की सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के करीब 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को अपना समर्थन देने और एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल में अपने गुट का विलय करने का खुला एलान किया है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद टीएमसी नेतृत्व पूरी तरह से हमलावर हो चुका है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस बगावत पर बेहद तीखा रुख अपनाते हुए बागी सांसदों पर बड़ा निशाना साधा है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी और राज्य की जनता के साथ एक बड़ा विश्वासघात करार दिया है।
कुणाल घोष का तीखा पलटवार
बागी गुट के इस कदम पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि जो सांसद आज एनडीए के पाले में जाने की बात कर रहे हैं, वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव नहीं जीते थे। उन्होंने साफ शब्दों में याद दिलाया कि इन सभी नेताओं को जनता ने तृणमूल कांग्रेस के सिंबल और ममता बनर्जी के चेहरे पर चुनकर संसद भेजा था। घोष ने तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल में जिन वोटरों ने इन सांसदों को अपना बहुमूल्य मत दिया था, वे पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए की नीतियों के विरोधी हैं। ऐसे में पाला बदलकर एनडीए खेमे में शामिल होना न केवल पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के साथ गद्दारी है, बल्कि उन लाखों जागरूक मतदाताओं के जनादेश का भी सरेआम अपमान और धोखा है जिन्होंने बीजेपी के खिलाफ इन्हें वोट दिया था।
क्या हो सकता है बागी गुट का अगला कदम
इस राजनीतिक संकट के बीच सियासी गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज है कि तृणमूल कांग्रेस का यह असंतुष्ट बागी गुट कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए उत्तर-पूर्व (नॉर्थ-ईस्ट) की एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी में विलय करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि वह क्षेत्रीय दल पहले से ही एनडीए गठबंधन का एक सक्रिय हिस्सा है। हालांकि, इस रणनीति को लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक और औपचारिक घोषणा होना बाकी है। सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, त्रिपुरा की ‘नेशनल नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी’ में टीएमसी के इस बागी धड़े के विलय की पूरी योजना बनाई जा रही है। इस बीच, बागी खेमे की प्रमुख नेता शताब्दी राय ने भी एक बड़ा बयान देते हुए पुष्टि की है कि वे लोग नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।
रविवार का पूरा राजनीतिक घटनाक्रम
रविवार को हुए इस पूरे सियासी ड्रामे में उस समय नया मोड़ आ गया जब टीएमसी के 20 सांसदों ने दिल्ली में स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। यह संख्या टीएमसी के संसदीय दल के दो-तिहाई से भी अधिक बताई जा रही है, जो दलबदल कानून से बचने के लिए बेहद जरूरी है। मुलाकात के बाद बागी गुट के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने मीडिया के सामने आकर पार्टी के असली चुनाव चिह्न और नाम पर अपना दावा ठोकने की बात कही।
उन्होंने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जब दो-तिहाई सांसद अलग होते हैं, तो वे पहले ही दिन सीधे तौर पर पार्टी के नाम का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने आगे की रणनीति बताते हुए कहा कि जब जुलाई के महीने में संसद का मानसून सत्र शुरू होगा, तब वे सदन के भीतर खुद को असली तृणमूल के रूप में पेश करेंगे और दो-तिहाई बहुमत के आधार पर मूल पार्टी पर अपना पूर्ण अधिकार जताएंगे।
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