Kalyan Banerjee Controversy : पश्चिम बंगाल के बारासात संसदीय क्षेत्र से सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपते हुए टीएमसी सांसद Kalyan Banerjee के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अपील की है कि संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए कल्याण बनर्जी को सदन से निष्कासित किया जाए।

महिला सांसदों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप
काकोली घोष दस्तीदार ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी लगातार संसद की कार्यवाही और बैठकों के दौरान उनके साथ-साथ अन्य महिला सांसदों के खिलाफ अभद्र, अपमानजनक और महिला विरोधी टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल व्यक्तिगत स्तर पर अपमानजनक हैं, बल्कि यह महिलाओं की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती हैं।

बार-बार दोहराया जा रहा व्यवहार बना गंभीर मुद्दा
10 जून को लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए इस पत्र में दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि यह कोई एक बार की घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी का यह व्यवहार लगातार दोहराया जा रहा है और अब यह एक चिंताजनक पैटर्न बन चुका है। उनके अनुसार, इस तरह के व्यवहार से संसद की कार्यशैली प्रभावित हो रही है।
डराने-धमकाने और मानसिक उत्पीड़न का आरोप
शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि कल्याण बनर्जी द्वारा किए गए व्यक्तिगत हमले, धमकी भरे व्यवहार और अभद्र टिप्पणियां केवल राजनीतिक असहमति तक सीमित नहीं हैं। काकोली घोष का कहना है कि यह सीधे तौर पर मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। इससे उन्हें व्यक्तिगत पीड़ा का सामना करना पड़ा है और सदन में असुरक्षा का माहौल बना है।
महिला सांसदों की स्वतंत्र भागीदारी पर असर
दस्तीदार ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि इस तरह का आचरण महिला सांसदों की स्वतंत्र, निडर और प्रभावी भागीदारी में बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि संसद जैसे लोकतांत्रिक मंच पर ऐसा वातावरण बनना बेहद चिंताजनक है, जहां महिला प्रतिनिधियों को सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
लोकसभा नियमों के उल्लंघन का हवाला
काकोली घोष ने कहा कि कल्याण बनर्जी का आचरण लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य-संचालन नियमावली के नियम 349 और 352 का उल्लंघन है। ये नियम सदन की मर्यादा, अनुशासन और गरिमा को बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सांसद को इन नियमों के खिलाफ जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
संविधान के अनुच्छेद 105 का किया जिक्र
उन्होंने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 105 का भी हवाला दिया, जिसमें सांसदों को बोलने की स्वतंत्रता का विशेषाधिकार प्राप्त है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विशेषाधिकार किसी के अपमान, उत्पीड़न या दुर्व्यवहार का लाइसेंस नहीं हो सकता।
कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग
अंत में काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष से नियम 314(1) के तहत मामले का तुरंत संज्ञान लेने और कल्याण बनर्जी के खिलाफ निष्कासन सहित कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संसद में सुरक्षित, सम्मानजनक और निष्पक्ष माहौल बनाए रखना लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है।
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