Trump China Tech Deal: अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे टिकटॉक विवाद में आखिरकार एक बड़ी सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार, 15 सितंबर 2025 को इशारा किया कि टिकटॉक को लेकर चीन के साथ समझौता हो गया है। यह समझौता उस तय समयसीमा से ठीक पहले हुआ है, जिसके बाद अमेरिका में टिकटॉक के संचालन पर पूरी तरह रोक लग सकती थी।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –”यूरोप में अमेरिका और चीन के बीच बड़ी व्यापारिक बैठक बहुत सफल रही! एक विशेष कंपनी पर भी समझौता हुआ, जिसे हमारे देश के युवा बहुत बचाना चाहते थे। वे बहुत खुश होंगे! मैं शुक्रवार को राष्ट्रपति शी से बात करूंगा। हमारे रिश्ते अब भी बहुत मजबूत हैं!!!” ट्रंप का यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि अमेरिका और चीन के बीच टिकटॉक को लेकर गतिरोध अब खत्म हो रहा है।

टिकटॉक पर अमेरिकी कानून और डेडलाइन
चीन की कंपनी बाइटडांस द्वारा संचालित टिकटॉक पर अमेरिका ने जनवरी 2025 में कानूनी प्रतिबंध लगाया था। अमेरिकी संसद ने 2024 में एक कानून पारित किया था, जिसमें कहा गया था कि यदि टिकटॉक की अमेरिकी हिस्सेदारी किसी अमेरिकी कंपनी को नहीं बेची गई, तो ऐप पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस कानून के अनुसार, 17 सितंबर 2025 तक डील नहीं होने पर टिकटॉक को अमेरिका से हटाया जा सकता था।
मैड्रिड में हुई अहम वार्ता
इस विवाद को सुलझाने के लिए स्पेन के मैड्रिड में अमेरिका-चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक वार्ता हुई। इसमें अमेरिका की ओर से ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीयर, जबकि चीन की ओर से उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग शामिल हुए। यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने और व्यापार विवादों को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अमेरिका-चीन संबंधों में बनी हुई है खटास
हालांकि टिकटॉक डील एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन अमेरिका-चीन संबंध अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह G7 और नाटो देशों से चीन और रूस से आयातित तेल पर प्रतिबंध लगाने का दबाव बना रहा है। चीन ने चेतावनी दी है कि यदि यह दबाव बढ़ा, तो वह भी जवाबी कदम उठाएगा।
टिकटॉक को लेकर हुआ यह समझौता अमेरिका-चीन संबंधों में एक सकारात्मक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। जहां अमेरिकी युवा टिकटॉक को लेकर राहत की सांस ले सकते हैं, वहीं यह समझौता ट्रंप प्रशासन की सख्त नीति और अंतिम समय की डिप्लोमेसी का उदाहरण भी बन गया है। अब सबकी नजर शुक्रवार को ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है।
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