Trump Kim Meeting : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच वॉशिंगटन में एक अहम मुलाकात हुई। इस दौरान उत्तर कोरिया, अमेरिका-दक्षिण कोरिया रिश्ते और अमेरिकी सैनिकों की तैनाती जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। राष्ट्रपति ली ने ट्रंप से इस साल उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से मुलाकात करने का प्रस्ताव रखा और उन्हें दक्षिण कोरिया आने का निमंत्रण भी दिया।

किम से फिर मुलाकात को तैयार ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि उन्हें भी इस साल किम से मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप तीन बार किम जोंग उन से मिल चुके हैं, लेकिन दूसरे कार्यकाल में अभी तक कोई बैठक नहीं हुई। उत्तर कोरिया ने अब तक अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को रोकने से इनकार किया है, जिस पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

ट्रंप और किम: पुराना रिश्ता, नई उम्मीद
ट्रंप ने किम को “मेरे साथ बहुत अच्छे रहे” कहकर उनकी फिर तारीफ की। एक समय ट्रंप ने यहां तक कहा था कि उन्हें और किम को “प्यार हो गया है”। हालांकि, पहले की मुलाकातों से तनाव तो कम हुआ लेकिन कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका। वहीं, किम जोंग उन ने बाइडेन सरकार के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है, जिससे उनके झुकाव की दिशा स्पष्ट हो जाती है।
ली की ट्रंप की तारीफ
राष्ट्रपति ली ने ओवल ऑफिस बैठक के बाद ट्रंप की खुले दिल से तारीफ करते हुए कहा कि ट्रंप ने अमेरिका को “शांति का रक्षक नहीं, बल्कि शांति का निर्माता” बना दिया है। ली ने उत्तर कोरिया में संभावित “ट्रंप टॉवर” और गोल्फ कोर्स की भी चर्चा की, जो कि दोनों नेताओं के रिश्ते की गर्मजोशी को दर्शाता है।
अमेरिकी सैनिकों के बदले और पैसे की मांग
ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में तैनात 28,500 अमेरिकी सैनिकों के खर्च को लेकर फिर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका को वहां की जमीन पर मालिकाना हक मिलना चाहिए, जहां उसके सैन्य बेस मौजूद हैं। फिलहाल दक्षिण कोरिया 1.14 बिलियन डॉलर (₹9462 करोड़) की राशि अमेरिका को हर साल देता है, लेकिन ट्रंप इसे नाकाफी मानते हैं और अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया की भूमिका
एक दिलचस्प मोड़ में ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि किम यूक्रेन युद्ध से उत्साहित हैं, क्योंकि उन्होंने उत्तर कोरियाई सैनिकों को रूस भेजा है और बदले में रूस से समर्थन हासिल किया है। यह उत्तर कोरिया की भू-राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना देता है।
ली और ट्रंप की यह मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि उत्तर कोरिया, अमेरिकी सैन्य नीति और दक्षिण कोरिया-अमेरिका संबंधों पर गहराई से चर्चा हुई। अगर ट्रंप फिर से राष्ट्रपति बनते हैं, तो कोरियाई प्रायद्वीप में नई कूटनीति की शुरुआत हो सकती है।










