Tsunami science : रूस के कामचटका क्षेत्र में मंगलवार को धरती जोर से कांपी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 8.8 मापी गई, जिससे इलाके में सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई। यह पहली बार नहीं है जब धरती के कंपन से समुद्री लहरें विकराल रूप ले रही हैं। इतिहास में कई बार ऐसी आपदाएं तबाही ला चुकी हैं, जिससे “सुनामी” शब्द फिर से चर्चा में आ गया है।
‘सुनामी’ शब्द की उत्पत्ति जापानी भाषा से हुई है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है—‘tsu’ जिसका अर्थ होता है बंदरगाह, और ‘nami’ जिसका मतलब होता है लहर। यानी ‘सुनामी’ का शाब्दिक अर्थ है ‘बंदरगाह की लहर’। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि जब समुद्र की गहराई में हलचल होती है, तो तटीय क्षेत्रों पर बड़ी लहरों के रूप में इसका असर दिखता है, खासतौर पर बंदरगाहों पर।
मौसम और भूकंप विज्ञानियों के अनुसार, सुनामी समुद्र तल में होने वाली भूकंपीय गतिविधियों का नतीजा होती है। जब टेक्टोनिक प्लेट्स खिसकती हैं या समुद्र के भीतर ज्वालामुखी फटता है, तब विशाल जलराशि हिलती है, जिससे विशाल लहरें उत्पन्न होती हैं। इन लहरों को ही वैज्ञानिक रूप से ‘सुनामी’ कहा जाता है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि 7.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप के बाद सुनामी आने की संभावना ज्यादा होती है। जब ये लहरें बनती हैं, तो समुद्र के भीतर हवा की रफ्तार करीब 800 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। वहीं, समुद्री लहरें 100 फीट तक ऊँचाई ले सकती हैं, जिससे तटीय इलाकों में भारी तबाही मच सकती है।
दुनियाभर में सुनामी की घटनाओं का सटीक आंकड़ा नहीं है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में आते हैं। इनमें भी प्रशांत महासागर सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है। अब तक 12 से अधिक प्रमुख सुनामी आ चुकी हैं, जिनमें लाखों लोगों की जानें गई हैं।
भविष्य में सुनामी की पहचान समय रहते हो सके, इसके लिए वैज्ञानिकों ने साल 2000 में DART (Deep Ocean Assessment and Reporting of Tsunamis) प्रणाली शुरू की थी। यह प्रणाली समुद्र तल पर लगे दबाव सेंसर और सतह पर तैरते उपकरणों की मदद से संभावित सुनामी की पहचान करती है। हालांकि, अब भी सटीक पूर्वानुमान लगाना बेहद कठिन है और यह विज्ञान के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।सुनामी एक प्राकृतिक आपदा है जिसकी भविष्यवाणी आज भी सटीक रूप से नहीं की जा सकती। लेकिन तकनीकी विकास और सतर्कता प्रणाली के जरिए इसके खतरों को कम किया जा सकता है। हर बार जब धरती कांपती है, तो सुनामी की आशंका लोगों को भयभीत कर देती है। इसीलिए इसका वैज्ञानिक और सामाजिक रूप से सही समझना आवश्यक है।
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