Uniform Civil Code : समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मंगलवार को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भोपाल पहुंचे, जहां उन्होंने UCC के विरोध में आयोजित जनसभा को संबोधित किया। ओवैसी ने प्रस्तावित कानून को लेकर केंद्र सरकार और बीजेपी पर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि UCC लागू करने से संविधान में मिले कुछ अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

संविधान के अनुच्छेदों का ओवैसी ने दिया हवाला
ओवैसी ने कहा कि UCC का संबंध संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 14 और 29 में दिए गए अधिकारों से है। उनके अनुसार धार्मिक स्वतंत्रता और विभिन्न समुदायों की अपनी परंपराओं को ध्यान में रखे बिना समान नागरिक कानून लागू नहीं किया जाना चाहिए। ये ओवैसी के राजनीतिक और कानूनी तर्क हैं; UCC की संवैधानिक वैधता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा।

ओवैसी ने बीजेपी के उद्देश्य पर भी सवाल उठाए
AIMIM प्रमुख ने आरोप लगाया कि बीजेपी UCC को समानता के उद्देश्य से लागू करने की बात कर रही है, लेकिन इसका प्रभाव मुस्लिम समुदाय पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित कानून धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। ओवैसी ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा और विभिन्न समुदायों की चिंताओं को ध्यान में रखने की मांग की।
अमित शाह के बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
UCC को लेकर ताजा विवाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 13 सितंबर के बयान के बाद और तेज हुआ। शाह ने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी-एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों में UCC पहले ही लागू किया जा चुका है और बाकी NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने की दिशा में काम होगा।
UCC को लेकर ओवैसी ने फिर साधा निशाना
ओवैसी इससे पहले भी UCC को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठा चुके हैं। 15 सितंबर को भोपाल में उन्होंने NDA में शामिल उन दलों से भी अपना रुख स्पष्ट करने की अपील की, जिनकी UCC को लेकर बीजेपी से अलग राय हो सकती है। इस मुद्दे पर NDA के भीतर भी अलग-अलग सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

भारत की विविधता और व्यक्तिगत कानूनों का मुद्दा
ओवैसी ने भारत की बहुलतावादी सामाजिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग धार्मिक और सामुदायिक परंपराएं मौजूद हैं। उनका तर्क है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में लागू व्यक्तिगत कानूनों को एक समान व्यवस्था में बदलने से पहले विभिन्न समुदायों के अधिकारों और परंपराओं पर चर्चा जरूरी है।
2018 में विधि आयोग ने क्या कहा था?
UCC पर बहस के दौरान 21वें विधि आयोग की 2018 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया जाता है। आयोग ने उस समय कहा था कि देश में UCC को लागू करना उस समय न तो आवश्यक था और न ही वांछनीय, तथा व्यक्तिगत कानूनों में सुधार पर जोर दिया था। हालांकि, यह 2018 की रिपोर्ट थी और वर्तमान UCC प्रस्ताव या बाद की नीतिगत चर्चाओं पर उसका निष्कर्ष सीधे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।
क्या है समान नागरिक संहिता यानी UCC?
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय नागरिकों के लिए समान नागरिक नियमों की व्यवस्था करना है। इसके दायरे में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं। बीजेपी लंबे समय से UCC को अपने प्रमुख नीतिगत और सामाजिक सुधार एजेंडे का हिस्सा बताती रही है।
UCC पर आगे भी जारी रहेगी राजनीतिक बहस
अमित शाह के 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के बयान और ओवैसी के विरोध के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आगे UCC का स्वरूप, राज्यों में इसकी प्रक्रिया और विभिन्न समुदायों से जुड़ी आपत्तियां इस बहस के प्रमुख विषय बने रहेंगे। मौजूदा स्थिति में केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों के स्तर पर इसकी प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है।
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