UN report Gaza : इजरायल और हमास के बीच जारी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। जहां एक ओर युद्धविराम की चर्चा चल रही है, वहीं दूसरी ओर गाजा में हालात और भी भयावह होते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में बताया है कि राहत सामग्री पाने की कोशिश में लगे 798 फिलिस्तीनी नागरिक मारे जा चुके हैं। इन लोगों को उस समय निशाना बनाया गया जब वे खाने के लिए कतारों में खड़े थे।
संयुक्त राष्ट्र की प्रेस कॉन्फ्रेंस जिनेवा में हुई, जिसमें 7 जुलाई तक की जानकारी साझा की गई। बताया गया कि इजरायली सेना ने न सिर्फ आम राहत शिविरों में बल्कि अमेरिकी सहायता शिविरों में भी नागरिकों पर गोलियां चलाईं। रिपोर्ट के अनुसार, 798 में से 615 लोग सीधे राहत शिविरों के पास मारे गए, जबकि बाकी लोग मदद के लिए जाते समय रास्ते में मारे गए।
गाजा की तस्वीरें पूरी दुनिया को झकझोर रही हैं। थालियों को लेकर कतार में खड़े भूखे लोग राहत सामग्री का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें खाना नहीं, गोलियां मिलीं। इजरायली सैनिकों ने ऐसे नागरिकों पर गोलियां बरसा दीं जो केवल पेट की आग बुझाने के लिए वहां पहुंचे थे। इस दिल दहला देने वाली घटना ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को भी चिंतित कर दिया है।
गाजा में इजरायली सेना ने बीते ढाई महीनों से पूरी तरह नाकेबंदी कर रखी है। इस गंभीर मानवीय संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा में राहत सामग्री भेजने की अनुमति दी। इसके तहत कई देशों से खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान भेजा गया, लेकिन इन्हें जरूरतमंदों तक पहुंचाना आसान नहीं रहा।
गाजा में भूख और कुपोषण के कारण हालात इतने बिगड़ गए हैं कि जब राहत सामग्री से भरे ट्रक वहां पहुंचे, तो भूखी भीड़ उन्हें लूटने दौड़ पड़ी। इजरायली सेना ने इस भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। यह कोई एक-दो घटनाएं नहीं हैं, बल्कि अब यह गाजा में आम होती जा रही हैं। इस क्रूरता ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
गाजा की हालत पहले से ही चिंताजनक थी। संयुक्त राष्ट्र की एक पूर्व रिपोर्ट में बताया गया था कि गाजा के लगभग 20 लाख निवासियों में से अधिकांश गंभीर कुपोषण से जूझ रहे हैं। इसमें अनुमान जताया गया था कि करीब 14 हजार बच्चे भूख से मर सकते हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि यहां के बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
गाजा अब एक ऐसा शहर बन चुका है जहां मौत आम हो गई है। हर दिन यहां किसी न किसी राहत शिविर, अस्पताल या स्कूल के पास गोलियों की आवाजें गूंजती हैं और बेकसूरों की लाशें गिरती हैं। राहत के लिए आगे आने वाले देशों और संगठनों के लिए यहां हालात संभालना बेहद मुश्किल हो गया है। संयुक्त राष्ट्र ने गाजा में हो रही मौतों को “भयावह मानव त्रासदी” बताया है और तत्काल मानवीय हस्तक्षेप की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट से साफ है कि गाजा में हालात सामान्य नहीं हैं, बल्कि हर दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। राहत के नाम पर जब भूखे लोगों को भी गोलियों से भून दिया जाता है, तो यह सिर्फ युद्ध नहीं, एक क्रूर नरसंहार बन जाता है। अब दुनिया की निगाहें इस ओर हैं कि क्या इजरायल-हमास संघर्ष जल्द रुकेगा या गाजा और भी गहरे जख्म झेलेगा।
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