Trump Attack On Brazil: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील पर 50% टैरिफ लगाने के अपने फैसले का बचाव करते हुए ब्राजील की वामपंथी लूला सरकार पर जमकर हमला बोला है। ट्रंप ने कहा कि ब्राजील की नीतियां न केवल खुद ब्राजील के लिए नुकसानदायक हैं, बल्कि अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को भी प्रभावित कर रही हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब ब्राजील ने इस मामले को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में उठाया है।

ब्राजील पर ट्रंप की तीखी टिप्पणी
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा “ब्राजील की मौजूदा सरकार वामपंथी है और दुर्भाग्यपूर्ण फैसले ले रही है। हम ब्राजील के लोगों का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी सरकार जो कर रही है, वह ब्राजील को ही कमजोर बना रही है।”

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा को बुलाने पर पुनर्विचार कर रहा है। उन्होंने यह कदम फिलिस्तीन के नेता महमूद अब्बास को UNGA में वीजा देने से इनकार किए जाने के फैसले से जोड़ा।
WTO में पहुंचा मामला, ब्राजील ने जताई नाराज़गी
ब्राजील की सरकार ने अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ को अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का उल्लंघन बताते हुए 11 अगस्त को WTO में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। राष्ट्रपति लूला ने अमेरिका के इस कदम को ब्राजील की न्यायिक प्रक्रिया में दखल करार दिया और कहा कि यह उनकी संप्रभुता पर चोट है।
ब्राजील की चेतावनी: देंगे मुंहतोड़ जवाब
हालांकि ब्राजील ने अभी तक कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है, लेकिन राष्ट्रपति लूला ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका टैरिफ बढ़ाता है, तो ब्राजील भी उतना ही टैरिफ अमेरिका के उत्पादों पर लगाएगा। उन्होंने कहा “हम अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।”
बढ़ता ट्रेड तनाव, वैश्विक बाजार पर असर संभव
इस घटनाक्रम के चलते अमेरिका और ब्राजील के बीच ट्रेड टेंशन बढ़ता दिख रहा है। ब्राजील अमेरिका का एक अहम व्यापारिक साझेदार है, खासकर कृषि और खनिज उत्पादों के क्षेत्र में। दोनों देशों के बीच तनाव का असर वैश्विक सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।
राजनयिक खिंचाव की शुरुआत?
ट्रंप के बयानों से स्पष्ट है कि अमेरिका ब्राजील की वामपंथी नीतियों को लेकर असहज है। वहीं, ब्राजील ने भी दो टूक जवाब देकर यह संकेत दे दिया है कि वह दबाव में नहीं आने वाला। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देश बातचीत से समाधान निकालते हैं या यह मुद्दा एक और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड वॉर की शुरुआत बनता है।
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