Ambikapur News : नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जा रहे पेयजल में ई-कोलाइटिस नामक बैक्टीरिया पाए जाने के बाद खलबली मच गई है। अब तक 42 से अधिक लोग पीलिया से पीड़ित हो चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीम सक्रिय हो गई है। प्रभावित क्षेत्र में संभावित मरीजों का ब्लड सैंपल लेने के साथ लोगों को सतर्क रहने कहा गया है। नगर निगम द्वारा पानी का सैंपल लेकर जांच की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र के मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रतिदिन भ्रमण करने, संभावित मरीजों की जांच और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया गया है।
जानकारी अनुसार वार्ड क्रमांक 40 में बड़ी संख्या में लोग पीलिया जैसे लक्षणों से ग्रसित पाए गए। नवागढ़ शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा अधिकारी डाक्टर जया अग्रवाल ने बताया कि लगातार बुखार, भूख न लगना और कमजोरी की शिकायतों के बाद पानी की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में पानी में ई-कोलाइटिस बैक्टीरिया की मात्रा अधिक पाई गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम डाक्टर जया अग्रवाल और सुपरवाइजर अनिल पांडेय के नेतृत्व में प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर रही है। टीम द्वारा घर-घर संपर्क कर लोगों को पानी उबालकर पीने, स्वच्छता बनाए रखने और बीमारी से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया गया। कुछ संभावित मरीजों के ब्लड सैंपल भी लिए गए हैं, ताकि गंभीर स्थिति बनने से पहले उपचार शुरू किया जा सके।
वहीं नगर निगम की टीम ने भी इलाके में पहुंचकर पेयजल के सैंपल एकत्र किए हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। मोहम्मद किदवई वार्ड के पार्षद मोहम्मद हसन खान ने बताया कि वार्ड में चार स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज के कारण दूषित पानी सप्लाई लाइन में प्रवेश कर रहा है, जिसकी शिकायत पूर्व में भी की गई थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर नगर निगम के जल प्रभारी एवं सहायक अभियंता प्रशांत खुल्लर ने कहा कि उन्हें पहले इस स्थिति की जानकारी नहीं थी।
नागरिकों का कहना है कि वे शुद्ध पेयजल के लिए कर का भुगतान करते हैं, ऐसे में दूषित पानी की सप्लाई गंभीर लापरवाही है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग सतर्क है और लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है, जबकि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की पहल की जाएगी।
मोमिनपुरा क्षेत्र के वार्डो में पीलिया के 42 से अधिक मरीज सामने आने और पेयजल जांच में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि होने के बाद नेता प्रतिपक्ष शफ़ी अहमद ने कलेक्टर को वस्तुस्थित से अवगत कराया है। उन्होंने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए तत्काल समन्वित कार्रवाई की मांग की है। नगर निगम में विपक्ष के नेता शफी अहमद ने बताया कि 14 फरवरी को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नवागढ़ की टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्र से लिए गए पेयजल सैंपलों की जांच मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कराई गई। जारी रिपोर्ट के अनुसार कई नमूनों में एमपीएन की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई।
कुछ सैंपलों में 22 से 28 एमपीएन प्रति 100 एमएल तक बैक्टीरियल लोड दर्ज किया गया, जो पेयजल की श्रेणी में स्वीकार्य नहीं है। मानक के अनुसार पेयजल में एमपीएन की संख्या शून्य होनी चाहिए। 10 से अधिक एमपीएन संदिग्ध तथा 50 से अधिक अत्यधिक प्रदूषित माना जाता है। सीवर में पाए जाने वाले फिकल कोलीफॉर्म और ई-कोलाई की पेयजल में मौजूदगी जलजनित गम्भीर बीमारियों का कारण है, जो क्षेत्र में बढ़ते पीलिया मामलों से सीधे तौर पर जुड़ी हो सकती है।
शफ़ी अहमद ने कलेक्टर को बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पत्र लिखकर जल स्रोत के डिसइंफेक्शन, पाइपलाइन और पंप की जांच, प्लेटफॉर्म रखरखाव तथा संरचनात्मक खामियों को दूर करने के निर्देश दिए गए थे। नगर निगम जल शाखा की टीम कुछ स्थानों से पानी का सेम्पल भी लिया है।स्वास्थ्य विभाग की टीम भी सक्रिय हुई है। बावजूद इसके, क्षेत्र में प्रभावी सुधारात्मक कार्रवाई स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ रही है। उन्होंने मोमिनपुरा, नवागढ़, रसूलपुर, जरहागढ़ और श्रीगढ़ क्षेत्रों में घर-घर सर्वे कर संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उपचार सुनिश्चित करने, नगर निगम और पीएचई विभाग संयुक्त रूप से व्यापक जल सैंपलिंग अभियान चलाने और जल आपूर्ति तंत्र की तकनीकी ऑडिट कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह केवल एक क्षेत्र का मामला नहीं, बल्कि पूरे शहर की पेयजल सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शिता के साथ नियमित मॉनिटरिंग रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि हाल ही में इंदौर में दूषित पेयजल के कारण फैली बीमारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लापरवाही कितनी महंगी पड़ सकती है। अंबिकापुर में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए अभी से सख्त और ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
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