Vice Presidential Election : उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा सपा-रालोद-डीएमके गठबंधन उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणियों को लेकर भाजपा ने पलटवार किया है। इस क्रम में भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने कांग्रेस उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को नक्सल समर्थक करार दिया है और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा अमित शाह पर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित प्रदेश भाजपा कार्यालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद संतोष पांडेय ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन ने जिस व्यक्ति को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया है, वह माओवादी विचारधारा से प्रेरित रहा है। उनका यह आरोप बीजेपी की ओर से पहली बार सामने आया बयान है, जिससे राजनीतिक वातावरण और गरमाया हुआ दिखता है।
सलवा जुडूम विपक्षी अदालत में पते की ‘गलत’ बात : पांडेय का आरोप
संतोष पांडेय ने दावा किया कि बी. सुदर्शन रेड्डी ने सलवा जुडूम आंदोलन के खिलाफ फैसला सुनाते समय आदिवासी समुदाय के हितों के विपरीत निर्णय दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले की कांग्रेस के ही भीतर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई थी, क्योंकि इसे आदिवासी विरोधी माना गया था। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि भाजपा इस मुद्दे को संवेदनशील क्षेत्र में खींचना चाह रही है।
दिवंगत नेताओं का उल्लेख कर कांग्रेस पर संवेदनहीन होने का आरोप
अपने बयान में संतोष पांडेय ने कांग्रेस के उन दिवंगत नेताओं, महेंद्र कर्मा और नंदकुमार पटेल को याद करते हुए कहा, “यदि सुप्रीम कोर्ट ने सलवा जुडूम के खिलाफ समय रहते फैसला नहीं दिया होता, तो नक्सलवाद दूर हो सकता था।” इस बीच, उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक हथियार बना रही है और संवेदनशील पीड़ितों को भूल गयी है। पांडेय ने यह भी कहा कि बी. सुदर्शन रेड्डी ने नक्सलियों की गतिविधियों को कभी ‘क्रांतिकारी’ कहकर सराहा था, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंतनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे विचारों वाला व्यक्ति देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंच जाए, तो यह लोकतंत्र और संवैधानिक मर्यादा दोनों के लिए खतरा बनेगा।
संसदीय राजनीति में उच्च संवैधानिक पदों की यह लड़ाई अब सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि नैतिक व आदर्शों पर आधारित हो चुकी है। भाजपा सांसद संतोष पांडेय के कड़े बयानों से अगले कुछ दिनों में इस जंग का राजनीतिक ताप और बढ़ने की संभावना है। कांग्रेस एवं गठबंधन नेताओं की ओर से अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले समय में इस बहस में नया मोड़ आ सकता है।
Read More : Karnataka Love Murder: कर्नाटक में प्रेमी ने की 20 वर्षीय युवती की वीभत्स हत्या, मुंह में बारूद डालकर किया विस्फोट
Vice Presidential Election में जुबानी जंग, संतोष पांडेय ने कांग्रेस उम्मीदवार को नक्सल समर्थक बताया, भूपेश बघेल की शाह टिप्पणी पर कड़ी निंदा
Vice Presidential Election : उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा सपा-रालोद-डीएमके गठबंधन उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणियों को लेकर भाजपा ने पलटवार किया है। इस क्रम में भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने कांग्रेस उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को नक्सल समर्थक करार दिया है और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा अमित शाह पर की गई टिप्पणी की कड़ी निंदा की है। सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित प्रदेश भाजपा कार्यालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद संतोष पांडेय ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन ने जिस व्यक्ति को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया है, वह माओवादी विचारधारा से प्रेरित रहा है। उनका यह आरोप बीजेपी की ओर से पहली बार सामने आया बयान है, जिससे राजनीतिक वातावरण और गरमाया हुआ दिखता है।
सलवा जुडूम विपक्षी अदालत में पते की ‘गलत’ बात : पांडेय का आरोप
संतोष पांडेय ने दावा किया कि बी. सुदर्शन रेड्डी ने सलवा जुडूम आंदोलन के खिलाफ फैसला सुनाते समय आदिवासी समुदाय के हितों के विपरीत निर्णय दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले की कांग्रेस के ही भीतर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई थी, क्योंकि इसे आदिवासी विरोधी माना गया था। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि भाजपा इस मुद्दे को संवेदनशील क्षेत्र में खींचना चाह रही है।
दिवंगत नेताओं का उल्लेख कर कांग्रेस पर संवेदनहीन होने का आरोप
अपने बयान में संतोष पांडेय ने कांग्रेस के उन दिवंगत नेताओं, महेंद्र कर्मा और नंदकुमार पटेल को याद करते हुए कहा, “यदि सुप्रीम कोर्ट ने सलवा जुडूम के खिलाफ समय रहते फैसला नहीं दिया होता, तो नक्सलवाद दूर हो सकता था।” इस बीच, उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक हथियार बना रही है और संवेदनशील पीड़ितों को भूल गयी है। पांडेय ने यह भी कहा कि बी. सुदर्शन रेड्डी ने नक्सलियों की गतिविधियों को कभी ‘क्रांतिकारी’ कहकर सराहा था, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंतनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे विचारों वाला व्यक्ति देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंच जाए, तो यह लोकतंत्र और संवैधानिक मर्यादा दोनों के लिए खतरा बनेगा।
संसदीय राजनीति में उच्च संवैधानिक पदों की यह लड़ाई अब सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि नैतिक व आदर्शों पर आधारित हो चुकी है। भाजपा सांसद संतोष पांडेय के कड़े बयानों से अगले कुछ दिनों में इस जंग का राजनीतिक ताप और बढ़ने की संभावना है। कांग्रेस एवं गठबंधन नेताओं की ओर से अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले समय में इस बहस में नया मोड़ आ सकता है।
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