Nepal Student Protest: नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ Gen-Z आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में हुए उग्र प्रदर्शनों में 16 छात्रों की मौत हो गई है, जबकि 100 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, वॉटर कैनन और आखिरकार फायरिंग का सहारा लिया।



संसद में घुसे प्रदर्शनकारी, सेना तैनात
प्रदर्शनकारी छात्रों ने नेपाल की संसद में घुसने की कोशिश की, जिसे रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। काठमांडू में कई जगहों पर आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव की घटनाएं सामने आई हैं। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है। वहीं राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आवास के आसपास सेना तैनात की गई है।

काठमांडू के मुख्य जिला अधिकारी ने कहा है कि जरूरत पड़ी तो रबर की गोलियों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

पीएम ओली की इमरजेंसी बैठक

बढ़ते जनविरोध के चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने युवाओं के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया है। सरकार ने आज शाम 6 बजे कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई है, जिसमें सोशल मीडिया बैन और आंदोलन को लेकर कोई बड़ा फैसला हो सकता है। खेल मंत्री संतोष पांडे ने कहा कि सरकार युवाओं की मांगों पर विचार कर रही है।

सिर्फ सोशल मीडिया नहीं, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार भी मुद्दा
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ इंटरनेट बैन के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के खिलाफ भी है। विराटनगर, भरतपुर और पोखरा में भी विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं। सरकार ने 4 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सऐप, रेडिट और X सहित 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगा दिया था। इसके चलते ऑनलाइन पढ़ाई, बिजनेस और कम्युनिकेशन पर असर पड़ा है।

सोशल मीडिया बैन से क्या बदला?

छोटे कारोबारी जो फेसबुक-इंस्टाग्राम के ज़रिए सामान बेचते थे, उनका बिजनेस ठप हो गया। YouTube और GitHub जैसे प्लेटफॉर्म बंद होने से छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ा। विदेश में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क करना महंगा और मुश्किल हो गया।हजारों लोग VPN का इस्तेमाल कर बैन तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने टिकटॉक पर बैन नहीं लगाया, और यहीं से आंदोलन की शुरुआत हुई। युवाओं ने वीडियो बनाकर नेताओं पर निशाना साधा और #RestoreOurInternet जैसे हैशटैग वायरल कर दिए।
Gen-Z प्रदर्शनकारी स्कूल यूनिफॉर्म में शामिल हुए, ताकि यह दिखाया जा सके कि यह आंदोलन सिर्फ युवाओं का है। 28 साल से ऊपर के लोगों को प्रदर्शन में आने नहीं दिया गया। प्रदर्शनकारियों की मांगें हैं:
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