छत्तीसगढ़

CM Vishnu Deo Sai Birthday: विष्णु देव साय जन्मदिन विशेष, पंच से मुख्यमंत्री तक का सफर और लखीराम अग्रवाल का मार्गदर्शन

CM  Vishnu Deo Sai Birthday: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज, 21 फरवरी 2026 को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने की उनकी यह यात्रा भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा उदाहरणों में से है, जहाँ सादगी और निष्ठा को सबसे ऊपर रखा जाता है। जशपुर के एक छोटे से गाँव बगिया से शुरू हुआ उनका सफर आज पूरे प्रदेश का नेतृत्व कर रहा है।

प्रारंभिक जीवन: जशपुर की माटी और किसान परिवार का संस्कार

विष्णु देव साय का जन्म 21 फरवरी 1964 को छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के बगिया गाँव में हुआ था। उनके पिता राम प्रसाद साय और माता जसमनी देवी साय ने उन्हें सादगी और मेहनत के संस्कार दिए। साय की प्रारंभिक शिक्षा कुनकुरी के हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी हुई।

उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति से जुड़ी रही है। उनके दादा बुधनाथ साय 1947 से 1952 तक विधायक रहे, जबकि उनके बड़े पिता नरहरि प्रसाद साय केंद्र में संचार राज्यमंत्री के रूप में सेवाएं दे चुके थे। 27 मई 1991 को उनका विवाह कौशल्या देवी साय से हुआ, और आज उनका परिवार उनकी इस गौरवशाली राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है।

राजनीतिक उदय: पंच से सरपंच और फिर विधानसभा की दहलीज

साय के राजनीतिक जीवन की नींव 1989 में पड़ी, जब वे अपने पैतृक गाँव बगिया के पंच चुने गए। उनकी सक्रियता और जनसेवा के प्रति समर्पण को देखते हुए 1990 में उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना गया। हालांकि, उनकी किस्मत में इससे भी बड़ी भूमिका लिखी थी।

उसी वर्ष (1990) में, अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान, उन्हें तपकरा विधानसभा सीट से भाजपा का टिकट मिला। उन्होंने जीत दर्ज की और 1990 से 1998 तक दो बार विधायक रहकर क्षेत्रीय राजनीति में अपनी धाक जमाई। यह वह दौर था जब उन्होंने संगठन के भीतर अपनी प्रशासनिक और संगठनात्मक क्षमता का लोहा मनवाया।

संसदीय सफर: चार बार सांसद और केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी

राज्य की राजनीति में सफल पारी खेलने के बाद, विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय राजनीति का रुख किया। वे रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार चार बार (1999, 2004, 2009 और 2014) सांसद निर्वाचित हुए। संसद में उन्होंने खाद्य, नागरिक आपूर्ति, कृषि और सूचना प्रौद्योगिकी जैसी महत्वपूर्ण समितियों में अपनी सेवाएं दीं।

2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी, तो साय को इस्पात, खान और श्रम मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया। केंद्र में मंत्री रहते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास और आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनका लंबा संसदीय अनुभव ही था जिसने उन्हें एक परिपक्व राजनेता के रूप में स्थापित किया।

लखीराम अग्रवाल: वो गुरु जिन्होंने ‘मानस पुत्र’ की तरह गढ़ा

विष्णु देव साय की सफलता की कहानी लखीराम अग्रवाल के बिना अधूरी है। अविभाजित मध्य प्रदेश में भाजपा के कद्दावर नेता रहे लखीराम जी को साय का ‘राजनीतिक गुरु’ और मार्गदर्शक माना जाता है। कहा जाता है कि साय की प्रतिभा को सबसे पहले उन्होंने ही पहचाना था।

1990 में पहली बार विधानसभा का टिकट दिलाने में अग्रवाल की भूमिका निर्णायक थी। वे साय की शांत कार्यशैली और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा से बेहद प्रभावित थे। राजनीति के गलियारों में विष्णु देव साय को लखीराम अग्रवाल का ‘मानस पुत्र’ कहा जाता है। उन्हीं के सिखाए सिद्धांतों पर चलते हुए साय ने कभी पद की लालसा नहीं की, बल्कि संगठन के आदेश को सर्वोपरि माना।

2023 का चुनाव और मुख्यमंत्री पद का ऐतिहासिक निर्णय

साल 2023 का छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव साय के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। भाजपा ने उन्हें घोषणा पत्र समिति सहित कई अहम जिम्मेदारियां सौंपीं। चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का वह बयान ऐतिहासिक बन गया, जिसमें उन्होंने जनता से कहा था— “आप इन्हें (साय को) जिताइये, इन्हें बड़ा आदमी हम बनाएंगे।”

10 दिसंबर 2023 को जब भाजपा विधायक दल की बैठक हुई, तो सर्वसम्मति से विष्णु देव साय को नेता चुना गया। एक आदिवासी चेहरा, लंबा संगठनात्मक अनुभव और निर्विवाद छवि— इन तीन कारकों ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाया।

‘अजातशत्रु’ की छवि: क्यों सबके प्रिय हैं विष्णु देव साय?

विष्णु देव साय को भारतीय राजनीति में ‘अजातशत्रु’ (जिसका कोई शत्रु न हो) के रूप में जाना जाता है। वे विवादों से कोसों दूर रहते हैं और अपनी बात बहुत ही सौम्य तरीके से रखते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के दौर से लेकर वर्तमान पीढ़ी तक, हर गुट और वर्ग में उनकी स्वीकार्यता है। उनकी यही सादगी उन्हें एक जननायक बनाती है।

मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में वे ‘मोदी की गारंटी’ को जमीन पर उतारने और प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाने के लिए संकल्पित हैं। आज उनके 62वें जन्मदिन पर प्रदेश भर में उत्साह का माहौल है।

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