Weight Loss : आज के समय में वजन कम करना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। डाइट शुरू करने के बाद सबसे बड़ी परेशानी अक्सर खाने की क्रेविंग को लेकर सामने आती है। खासतौर पर दोपहर के भोजन या रात के डिनर के बाद कुछ मीठा खाने का मन बार-बार कर सकता है। कई बार यह तलब इतनी तेज होती है कि व्यक्ति अपनी डाइट को नजरअंदाज कर मीठा खा लेता है।
मीठा खाने की क्रेविंग सिर्फ इच्छाशक्ति की कमी नहीं
जनरल फिजिशियन और सीनियर कंसलटेंट, इंटरनल मेडिसिन डॉ. प्रसन्ना कार्तिक एस के अनुसार, वजन घटाने के दौरान बढ़ने वाली शुगर क्रेविंग के पीछे शरीर में होने वाले कुछ शारीरिक बदलाव भी जिम्मेदार हो सकते हैं। जब व्यक्ति लंबे समय तक कैलोरी कम लेता है, तो शरीर ऊर्जा की कमी को महसूस करता है और भूख तथा भोजन की इच्छा को बढ़ाने वाले संकेत सक्रिय हो सकते हैं।
घ्रेलिन हार्मोन बढ़ा सकता है भूख का संकेत
घ्रेलिन को आमतौर पर भूख से जुड़ा हार्मोन माना जाता है। कैलोरी का सेवन कम होने पर इसके संकेत बढ़ सकते हैं, जिससे व्यक्ति को ज्यादा भूख महसूस हो सकती है। ऐसे में सिर्फ सामान्य भोजन ही नहीं, बल्कि जल्दी ऊर्जा देने वाले मीठे खाद्य पदार्थों की इच्छा भी बढ़ सकती है। इसलिए डाइटिंग के दौरान बार-बार खाने का मन होना असामान्य नहीं है।
लेप्टिन कम होने से प्रभावित हो सकता है भूख नियंत्रण
लेप्टिन शरीर के फैट टिश्यू से बनने वाला हार्मोन है, जो दिमाग को शरीर की ऊर्जा स्थिति और भूख से जुड़े संकेतों के बारे में जानकारी देता है। वजन और शरीर की वसा कम होने के साथ लेप्टिन का स्तर भी घट सकता है। इससे भूख बढ़ने और वजन घटाने की प्रक्रिया को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल महसूस हो सकता है।
कैलोरी की कमी पर शरीर ऊर्जा बचाने लगता है
मानव शरीर ऊर्जा की उपलब्धता कम होने पर उसे बचाने की दिशा में प्रतिक्रिया करता है। जब कोई व्यक्ति बहुत कम कैलोरी लेता है, तो शरीर को ऊर्जा की कमी का संकेत मिल सकता है। इसी कारण खाने की इच्छा बढ़ सकती है और मीठे या अधिक ऊर्जा वाले खाद्य पदार्थ आकर्षक लग सकते हैं। इसलिए हर शुगर क्रेविंग को अनुशासन की कमी समझना सही नहीं है।
स्ट्रिक्ट डाइट और कम प्रोटीन भी बढ़ा सकते हैं क्रेविंग
खाना छोड़ना, बहुत ज्यादा सख्त डाइट अपनाना या भोजन में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर शामिल नहीं करना भी बार-बार भूख लगने का कारण बन सकता है। अगर भोजन पेट को लंबे समय तक संतुष्ट नहीं रखता, तो खाने के कुछ समय बाद ही व्यक्ति को दोबारा कुछ खाने की इच्छा हो सकती है। संतुलित भोजन इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है।
तनाव और नींद की कमी से भी बढ़ सकती है मीठे की इच्छा
मीठे खाद्य पदार्थ दिमाग के उन रिवॉर्ड सिस्टम को सक्रिय कर सकते हैं, जो खुशी और संतुष्टि से जुड़े होते हैं। तनाव, नींद की कमी और पसंदीदा खाद्य पदार्थों से लंबे समय तक दूरी बनाने पर कुछ लोगों में मीठे की क्रेविंग ज्यादा महसूस हो सकती है। किसी भोजन को पूरी तरह प्रतिबंधित करना भी डाइट को बनाए रखना मुश्किल बना सकता है।
क्रेविंग कंट्रोल करने के लिए संतुलित डाइट जरूरी
वजन घटाते समय भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्व शामिल करना महत्वपूर्ण है। भोजन समय पर करें और कैलोरी में कटौती इतनी ही रखें जिसे शरीर और रोजमर्रा की गतिविधियां सहज रूप से संभाल सकें। पर्याप्त पानी पीना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और अच्छी नींद लेना भी भूख को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है।
लगातार क्रेविंग के साथ ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से मिलें
कभी-कभार मीठा खाने की इच्छा होना सामान्य है और इसे अकेले डायबिटीज या किसी हार्मोनल समस्या का संकेत नहीं माना जा सकता। हालांकि, अगर लगातार तेज मीठे की क्रेविंग के साथ बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना या बिना वजह थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक ब्लड शुगर और अन्य कारणों की जांच कर सकते हैं।
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