Bengal Election Violence
Bengal Election Violence : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य में राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच वर्चस्व की जंग अब सड़कों पर हिंसक रूप ले चुकी है। ताजा घटना कूचबिहार जिले के माथाभंगा इलाके की है, जहाँ चुनावी माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब भाजपा उम्मीदवार सावित्री बर्मन की गाड़ी पर कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि उम्मीदवार के वाहन में तोड़फोड़ भी की। इस घटना के बाद इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने माथाभंगा और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी है। भाजपा नेतृत्व ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए चुनाव आयोग से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
दूसरी ओर, केंद्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एनआईए ने चुनाव के दौरान न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर दबाव बनाने के गंभीर मामले में कुल 7 लोगों को हिरासत में लिया है। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह है कि हिरासत में लिए गए लोगों में कांग्रेस का एक उम्मीदवार और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) का एक पंचायत सदस्य भी शामिल है। यह पूरा मामला मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा हुआ है, जिसमें स्थानीय लोग कुछ नामों को हटाए जाने का विरोध कर रहे थे। इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने जैसी स्थिति पैदा हो गई थी।
हिरासत में लिए गए लोगों में मालदा की मोथाबाड़ी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सायम चौधरी प्रमुख हैं। जानकारी के अनुसार, जब सायम चौधरी अलीनगर पंचायत क्षेत्र में अपने समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार कर रहे थे, तभी एनआईए की टीम ने उन्हें दबोच लिया। उनके साथ उनके कुछ करीबी सहयोगियों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। एनआईए का कहना है कि ये लोग उस भीड़ का हिस्सा थे या उसे उकसा रहे थे, जिसने न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालते हुए अधिकारियों का घेराव किया था। इस गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे चुनावी सरगर्मी और बढ़ गई है।
मालदा की यह घटना इतनी गंभीर थी कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। न्यायालय ने इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल प्रशासन और पुलिस की ढुलमुल कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद, निर्वाचन आयोग ने 1 अप्रैल को इस पूरे प्रकरण की जांच एनआईए को सौंप दी थी। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इस घेराव में अलग-अलग राजनीतिक दलों के सदस्यों की मिलीभगत थी।
एनआईए की जांच में चौंकाने वाले सुराग मिले हैं। एजेंसी ने आईएसएफ के ग्राम पंचायत सदस्य गुलाम रब्बानी को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, रब्बानी की गिरफ्तारी एआईएमआईएम (AIMIM) के सदस्य मोफक्करुल इस्लाम से हुई पूछताछ के आधार पर की गई है। मोफक्करुल को पहले राज्य पुलिस ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद एनआईए ने उससे कड़ी पूछताछ की। इन गिरफ्तारियों से यह संकेत मिलता है कि मतदाता सूची विवाद के पीछे एक संगठित राजनीतिक साजिश हो सकती है। फिलहाल, एनआईए हिरासत में लिए गए सभी 7 लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि इस घेराव के पीछे के मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके। पूरे राज्य में इस समय सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
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