West Bengal Politics
West Bengal Politics: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते हमलों और हाल ही में हुई दो हिंदू युवकों की नृशंस हत्या ने भारत में राजनीतिक और सामाजिक उबाल पैदा कर दिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी के एक हालिया बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सुवेंदु अधिकारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश की स्थिति की तुलना गाजा से करते हुए बेहद सख्त रुख अपनाने की वकालत की है। उनके इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उन पर नफरत फैलाने और नरसंहार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
कोलकाता में आयोजित एक विशाल विरोध रैली के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं का उल्लेख करते हुए बांग्लादेश को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह इजराइल ने अपनी सुरक्षा के लिए गाजा में सख्त कार्रवाई की है, ठीक वैसा ही सबक बांग्लादेश को भी सिखाया जाना चाहिए। उन्होंने भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि आतंक और अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके इस बयान को भाजपा की आक्रामक विदेश नीति और हिंदुत्व के एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रही ज्यादतियों के विरोध में शुक्रवार को कोलकाता में हिंदू संगठनों ने एक विशाल मार्च निकाला। इस रैली में सुवेंदु अधिकारी लगभग 1000 साधु-संतों के साथ शामिल हुए। प्रदर्शनकारी ‘बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन’ तक पहुंचे, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कई संत हाई कमीशन के गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप करे ताकि बांग्लादेश में हिंदुओं का रक्तपात रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने सुवेंदु अधिकारी के बयान की कड़ी निंदा की है। TMC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भाजपा ने नफरत और कट्टरता को अपनी पहचान बना लिया है। पार्टी ने सुवेंदु की सोच को ‘फासीवादी’ करार देते हुए कहा कि वे खुलेआम मुसलमानों के नरसंहार की बात कर रहे हैं। TMC ने सवाल उठाया कि जब सुवेंदु खुले मंच से लोगों की जान लेने और एक समुदाय को खत्म करने की बात कर रहे हैं, तो उनके खिलाफ अब तक कोई FIR दर्ज क्यों नहीं हुई? पार्टी ने उन पर UAPA न लगाए जाने को लेकर भी प्रशासन और केंद्र पर निशाना साधा है।
विवाद की मुख्य वजह बांग्लादेश में हुई दो हालिया हत्याएं हैं। 18 दिसंबर को ढाका में दीपू चंद्र दास और 24 दिसंबर को राजबाड़ी में अमृत मंडल नाम के युवकों की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। अमृत मंडल पर जबरन वसूली का आरोप लगाकर भीड़ ने उन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। इन घटनाओं ने पश्चिम बंगाल समेत पूरे भारत के हिंदू समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
सुवेंदु अधिकारी के बयान ने न केवल राज्य की आंतरिक राजनीति को गर्मा दिया है, बल्कि भारत-बांग्लादेश कूटनीतिक संबंधों के लिए भी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जहां एक तरफ भाजपा इसे हिंदुओं के मानवाधिकारों का मुद्दा बता रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल इसे नफरत की राजनीति करार दे रहा है।
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